गोरखपुर। स्वयं सहायता समूह की महिलाएं गोरखपुर को प्लास्टिक मुक्त बनाने के उद्देश्य के साथ कपड़ों के कैरी बैग बनाने में जुटी है। वे प्लास्टिक की जगह कपड़ों के कैरी बैग उपयोग कर पर्यावरण के प्रति लोगों को जागरूक कर रही। महिलाएं स्वयं कैरी बैग तैयार करने के साथ ही उन्हें दुकानों पर जाकर दुकानदाराें को प्लास्टिक से पर्यावरण को होने वाली हानियों के बारे में बताती है।
संगीता मिश्रा 2018 से बैग और सजावटी सामान बनाती है। प्रदर्शनियों और मेलों में स्टॉल लगाने के साथ दुकान बनाकर जीवनयापन करती है। एक बार उसने प्लास्टिक के थैले से होने वाले प्रदूषण के बारे में सुना तो इसको कम करने के तरीकों को अपनाना शुरू किया। इसी बीच उसे कपड़ों के कैरी बैग बनाने वाली मशीन के बारे में पढ़ा। ग्रामीण आजीविका मिशन से सहायता लेकर संगीता ने दिल्ली से कैरी बैग बनाने वाली मशीन को मंगाया और बांसगांव के जिगिनी भियांव स्थित अपने गांव की महिलाओं को इसका प्रशिक्षण दिया। समूह से जुड़ी 14 महिलाओं कैरी बैग बनाने के साथ ही लोगों को उसके उपयोग के बारे में बताती है। प्लास्टिक थैले से किस तरह पर्यावरण को हानि हो रही, इसके बारे में लोगों को जागरूक कर उसे उपयोग न करने की सलाह देती हैं।
संगीता बताती है कि पति संतोष मिश्रा बैग बनाने का काम जानते थे। यह काम उन्होंने भी सीख लिया। जब प्लास्टिक की जगह कपड़ों के बैग के बारे में सुना तबसे वह इस काम में जुट गए। प्लास्टिक प्रदूषण को कम करने उद्देश्य से काम कर रहे हैं। कानपुर से इसके लिए कैनवास का कपड़ा मंगाते है। बैग बनाने में बचत अच्छी हो जाती है । कैरी बैग को छोटे वेंडर को देने की प्राथमिकता हमेशा रहती है। वहां प्लास्टिक के बैग के ज्यादा प्रयोग किए जाते है। महिलाएं बैग बनाने के साथ लोगों को उसे उपयोग कर प्लास्टिक प्रदूषण कम करने में योगदान करने के लिए अपील भी कर रही हैं।