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Gorakhpur News: हर दर्द दूर कर देती थी नतिनी की एक झलक, अब कहां मिलेंगी मेरी प्रीत और पलक

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बांसगांव इलाके के बैदोली बाबू गांव में दो बहनों की रविवार को संदिग्ध परिस्थितियों में मौत होने के बाद सोमवार को वहां सन्नाटा पसरा रहा। इस पूघी घटना से सदमें में आए बच्चियों के बाबा रामवृक्ष जायसवाल किसी को भी देखकर फफक कर रोने लग रहे थे। सबसे यही कहते जिन नातिनों को कंधे पर बैठाकर घुमाया करता था, कभी सोचा भी नहीं था कि उनकी लाश को कंधा देना पड़ेगा। उनका दाह संस्कार करूंगा। तीनों नातिन मेरी आंखों का तारा थीं। उन्हें देखकर सुकून मिलता था। अब प्रीत और पलक की झलक मैं कभी नहीं देख पाऊंगा...।
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सोमवार को रामवृक्ष जायसवाल घर के दरवाजे पर बैठे थे। आस-पास के लोग गुजरते हुए उनसे छोटी नातिन अप्सरा का हाल पूछ रहे थे। जिसका इलाज मेडिकल कॉलेज में चल रहा है। वहीं प्रीत और पलक की मौत कैसे हुई इस रहस्य को हर कोई जानने का प्रयास करता दिखा। माता-पिता के झगड़े में बच्चे पिस गए, इस तरह की बातें भी लोग करते दिखे। वहीं प्रीत और पलक की मौत के बाद उनके खपरैल के घर एक बड़ा सा ताला लटका हुआ था।
गांव के मोहन शर्मा ने बताया कि सुबह पांच बजे उठ कर गाय को चारा डाला रहा था, तभी रामवृक्ष ने बुलाया। उनके साथ गया देखा कि प्रीत बिस्तर पर अचेत पड़ी थी। शरीर ठंडा था, तब-तक पलक और अप्सरा ठीक थीं। प्रीत का शव बाहर निकालने के बाद पलक और अप्सरा भी उल्टी करने लगीं। दोनों को अस्पताल लेकर गए, वहां पलक की सांसें भी थम गईं। अप्सरा को मेडिकल कॉलेज भेज दिया गया।
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पड़ोस की महिला आशा कन्नौजिया ने बताया कि लक्ष्मी से बात होती थी, कभी उसने कोई परेशानी तो नहीं बताई। विवेक ने बताया कि मेरे सामने ही बच्चे खेलते थे, अब उधर देखने पर बच्चियों की याद आ रही है।

इस मामले में प्रीत और पलक के माता-पिता द्वारा समूह से 80 हजार रुपये कर्ज लिया था, इसे चुकाने के लिए दबाव भी बनाया जा रहा था, इसकी चर्चा भी हो रही है। इसकी असलियत जानने के लिए समूह की महिला सखी फातिमा से बात करने का प्रयास किया गया तो उन्होंने बात करने से मना कर दिया।


आखिरी बार धोबी ने कराई थी मां से बात

आस-पास के लोगों ने बताया कि शनिवार की रात में बंगलूरू से बच्चियों की मां लक्ष्मी का गांव के धोबी के मोबाइल पर फोन आया था। धोबी ने बड़ी बेटी पलक से लक्ष्मी की बात कराई थी। इस दौरान पलक मां से जल्दी आने के लिए कह रही थी।


अलग-अलग ट्रेन से घर आ रहे माता-पिता



जानकारी के अनुसार, बच्चियों के पिता रोहित जायसवाल बंगलूरू में काम करते हैं। 28 मई को पत्नी लक्ष्मी भी तीनों बेटियों को उनकी मौसी के घर छोड़कर पांच वर्षीय बेटे के साथ बंगलूरू गई थीं। जहां पर दोनों के बीच विवाद भी हुआ था। मौत की खबर सुनने के बाद रोहित रविवार को ही ट्रेन से घर के लिए निकला, जबकि लक्ष्मी सोमवार को ट्रेन से घर वापस आने के लिए निकली है। दोनों सोमवार को घर नहीं पहुंचे थे। रोहित ने मोबाइल से बातचीत में बताया कि वह बेटियों को बंगलूरू लाने के लिए जा रहे थे, तभी दुखद सूचना मिली। वहीं मां लक्ष्मी का कहना है कि उन्होंने अपनी बहन के घर बच्चों को छोड़ा था, फिर उन्हें किसने घर वापस बुलाया है।


दादी बोली-झगड़ालू है बहू
मेडिकल कॉलेज के बाल सेवा संस्थान के पीआईसीयू में छह वर्ष की अप्सरा का इलाज चल रहा है। उसकी देखभाल दादी मोराती देवी कर रही हैं। शाम सात बजे उनसे बात हुई। उन्होंने बताया कि अप्सरा सो रही है। उसकी तबीयत में सुधार हुआ है। हम पति-पत्नी अपने बड़े बेटे संजय के साथ रहते हैं। मेरी छोटे बेटे रोहित की पत्नी लक्ष्मी बहुत झगड़ालू है। वह बच्चों की देखभाल ठीक से नहीं करती थी, इसलिए ऐसी घटना हुई।


क्या कहते हैं पुलिस अधिकारी
एसपी दक्षिणी जितेंद्र कुमार तोमर ने बताया कि फारेंसिक टीम घटना के बाद घर पहुंची थी। वहां पर एक कीटनाशक दवा मिली थी, लेकिन उस दवा से किसी की मौत नहीं हो सकती है। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में भी कुछ खास नहीं मिला है। इसलिए विसरा सुरक्षित किया गया है। इसकी रिपोर्ट आने पर मौत का कारण स्पष्ट होगा।
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