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गोरखपुर एम्स : 12 वर्ष से बंद था युवती का मुंह, ऑपरेशन कर खोला गया- जानिए कैसे चेहरा हो गया था खराब

Tue, 04 Mar 2025 11:41 AM IST
रोहित सिंह अमर उजाला ब्यूरो

सार

एम्स के दंत रोग विभाग के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले ओपीडी में एक युवती को लेकर उसके पिता आए थे। उन्होंने बताया कि कान में हुए घाव को 12 वर्ष पहले ऑपरेशन करके निकाला गया था। लेकिन सही तरीके से ऑपरेशन नहीं होने के कारण उसकी स्थिति खराब हो गई।
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गोरखपुर एम्स - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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बेलघाट इलाके की 22 वर्षीय युवती के 12 साल से बंद मुंह को एम्स के दंत रोग विभाग में तीन घंटे तक चले ऑपरेशन के बाद खोलने में सफलता मिली है। पहले हुई कान की सर्जरी की असफलता के कारण युवती का चेहरा खराब हो गया था।

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जबड़े का सही से विकास नहीं होने के कारण उसे सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। डॉक्टरों ने चेहरे की नसों को बचाते हुए सिर के अंदर से मांस निकालकर उसका एक हिस्सा काटकर जबड़े की हड्डियों के ज्वाइंट में डालकर अलग किया।

एम्स के दंत रोग विभाग के ओरल एवं मैक्सिलोफेशियल सर्जन डॉ. शैलेश कुमार ने बताया कि कुछ दिन पहले ओपीडी में एक युवती को लेकर उसके पिता आए थे। उन्होंने बताया कि कान में हुए घाव को 12 वर्ष पहले ऑपरेशन करके निकाला गया था।
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लेकिन सही तरीके से ऑपरेशन नहीं होने के कारण उसकी स्थिति खराब हो गई। मुंह खोलने में दिक्कत आने लगी। इसके कारण वह केवल तरल आहार ले पाती है और कुपोषण का शिकार हो गई। जांच में पता चला कि इस युवती की खोपड़ी की हड्डी और निचले जबड़े की हड्डी आपस में जुड़ गई थी।

ऑपरेशन के लिए नई तकनीक इंटरपोजीशनल आर्थोप्लास्टी को अपनाया गया। इस विधि से केवल तीन घंटे में सर्जरी को सफलतापूर्वक पूरा कर लिया। मरीज की स्थिति अब सामान्य है, वह ओएमएफएस वार्ड में डॉक्टरों की निगरानी में भर्ती है। उसे कुछ व्यायाम और दवाओं को लेने के लिए कहा गया है।

बेहोश करना था सबसे चुनौतीपूर्ण कार्य
इस मरीज को बेहोश करना बड़ी चुनौती थी, क्योंकि उसका मुंह पूरी तरह से बंद था। इस कारण एनेस्थीसिया विभाग की टीम ने नाक के जरिए फाइबर ऑप्टिक श्वास नली डालकर बेहोश करने की प्रक्रिया पूरी की। ऑपरेशन टीम में डॉ. शैलेश कुमार के साथ एसआर डॉ. प्रवीण सिंह, जेआर डॉ. सौरभ सिंह, एनेस्थेसिया विभाग के डॉ. संतोष कुमार शर्मा, डॉ. शफाक आदि शामिल रहे।

क्या है इंटरपोजीशनल आर्थोप्लास्टी
इंटरपोजीशनल आर्थोप्लास्टी में दो हड्डियों के बीच एक इंटरपोजिशनल (मांस का टुकड़ा या अन्य) सामग्री डाली जाती है। इसमें हड्डियों के बीच कुशनिंग बनी रहती है। साथ ही घर्षण कम होता है और जोड़ों की गति बनी रहती है।

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