आईएमए के पूर्व व वर्तमान पदाधिकारी
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इसके अलावा जहां ट्रामा सेंटर होगा, वहां ऑक्सीजन की 24 घंटे उपलब्धता, तीन शिफ्ट में डॉक्टरों की मौजूदगी, प्रशिक्षित स्टॉफ और खुद के एंबुलेंस आदि के नियम के सख्ती से पालन की बात कही गई थी। इन नए नियमों के आधार पर पंजीकरण व नवीनीकरण के लिए 30 अप्रैल तक पोर्टल पर आवेदन करना है।
इसके बाद एक मई से आवेदनों का सत्यापन कर पंजीकरण या नवीनीकरण किया जाना है। नए नियमों की सख्ती से करीब 300 अस्पतालों के मान्यता पर संकट आ गया था।
अमर उजाला में रविवार के अंक में इस खबर के प्रमुखता से प्रकाशित होते ही खलबली मच गई। मामले की गंभीरता को देखते हुए आईएमए ने हस्तक्षेप किया। इसके बाद शाम साढ़े सात बजे से आईएमए भवन में बैठक शुरू हुई। स्वास्थ्य विभाग की तरफ से डिप्टी सीएमओ व पंजीकरण प्रभारी डॉ. एके सिंह पहुंचे। आईएमए से जुड़े डॉक्टरों ने अस्पतालों के पंजीकरण में आने वाली दिक्कतों पर चर्चा की।
इस दौरान डॉ. एके सिंह ने कहा कि ये नियम अवैध अस्पतालों पर नियंत्रण के लिए लागू किए गए हैं। प्रशिक्षित डॉक्टरों पर इसका प्रभाव नहीं पड़ेगा। पंजीकरण में आने वाली दिक्कतों को स्वास्थ्य विभाग की तरफ से दूर कराया जाएगा। उन्होंने कहा कि जो डॉक्टर ऑन काल या अंशकालिक तौर पर काम कर रहे हैं, उन्हें पंजीकरण में इसका उल्लेख करना होगा और इससे संबंधित शपथ पत्र भी देना होगा।
आईएमए के एक्जक्यूटिव मेंबर डॉ इमरान अख्तर
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आईएमए वाराणसी शाखा में नई कार्यकारिणी का चुनाव 26 को
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सीएमओ डॉ आशुतोष दुबे ने बताया हाईकोर्ट के निर्देशानुसार ही अस्पतालों के पंजीकरण की प्रक्रिया पूर्ण कराई जाएगी। एक डॉक्टर के नाम पर एक ही अस्पताल का पंजीकरण होगा, लेकिन वे एक से अधिक जगह प्रैक्टिस कर सकेंगे। इसकी सूचना पंजीकरण में देनी होगी। अस्पताल पंजीकरण व नवीनीकरण के लिए 30 अप्रैल तक आवेदन किया जाएगा। आईएमए को भी नियमों से अवगत कराया गया है।
अध्यक्ष आईएमए स्मिता जायसवाल ने बताया कि अभी एनेस्थिसिया, पीडियाट्रिक और कई अन्य स्पेशलिस्टों की कमी है। इसके चलते एक डॉक्टर को एक से अधिक जगह अपनी सेवाएं देनी होती हैं। ऐसे में अगर प्रैक्टिस पर रोग लगेगी तो इससे मरीजों को नुकसान होगा। लेकिन, अवैध अस्पतालों पर नियंत्रण के लिए नियमों में कुछ सख्ती भी जरूरी है।
इसलिए यह ठीक है कि अगर डॉक्टर एक से अधिक जगह प्रैक्टिस करते हैं तो इसकी सूचना स्वास्थ्य विभाग को जरूर दें। दूसरे स्वास्थ्य विभाग को भी यह चेक करना चाहिए, कि अस्पताल पर जिसके नाम का बोर्ड लगा है, वह वहां वास्तव में प्रैक्टिस कर रहा है या नहीं। अवैध अस्पतालों के संचालन पर रोक लगाने में सबकी भूमिका होनी चाहिए।
एक्जक्यूटिव मेंबर, आईएमए, डॉ इमरान अख्तर ने बताया कि डॉक्टरों के नाम का गलत इस्तेमाल न हो, इसके लिए एक अस्पताल-एक डॉक्टर का नियम ठीक है। डॉक्टरों को एक से अधिक जगह प्रैक्टिस की छूट के दौरान इस बात का ख्याल जरूर रखा जाए कि इसका कोई गलत इस्तेमाल न करे।
डॉक्टर खुद भी अगर कहीं पहले प्रैक्टिस किए हैं और उन्हें इस बात की जानकारी है कि वहां हमारे नाम का बोर्ड लगा था, तो समय-समय पर चेक करते रहें। कहीं ऐसा न हो कि आपके नाम पर कोई झोलाछाप, मरीजों को ठग ले। इससे अंतत: अच्छे डॉक्टरों की ही बदनामी होती है। इसलिए अवैध धंधे पर नकेल कसने में हमें भी सहयोग करना चाहिए।