पुलिस की एक टीम ने उस नंबर का लोकेशन ट्रेस करते हुए महाराष्ट्र की ओर टीम भेजी, जबकि दूसरी टीम जिला अस्पताल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच में जुटी है। जांच में यह पता चला है कि जिस जगह पर रुपये लिए गए वहां कोई सीसी कैमरा नहीं था। जालसाज ने यह सुनिश्चित कर रखा था कि स्थान सुरक्षित हो और पहचान का खतरा न हो।
सिकरीगंज स्थित न्यू राजेश हाईटेक अस्पताल के संचालक को कार्रवाई से बचाने के नाम पर वसूली के मामले की जांच तेज हो गई है। हालांकि सीएमओ डॉ. राजेश झा के नाम से 15 लाख रुपये की वसूली करने वाले जालसाजों तक पुलिस अभी पहुंच नहीं पाई है।
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पुलिस की एक टीम मोबाइल नंबर का लोकेशन ट्रेस करते हुए मुंबई निकली है तो वहीं दूसरी टीम जिला अस्पताल के आस-पास के सीसी कैमरों की जांच में जुटी है। अब तक की जांच में सामने आया है कि जिस जगह पर हॉस्पिटल संचालक राजेश राय से रुपये लिए गए थे वहां सीसी कैमरा ही नहीं लगा था।
अस्पताल के संचालक राजेश राय से सीएमओ डॉ. राजेश झा के नाम का इस्तेमाल कर 15 लाख रुपये की वसूली की गई, जिसकी सच्चाई सामने आने के बाद पूरे शहर में सनसनी फैल गई। पुलिस अब तक जालसाजों तक नहीं पहुंच पाई है, लेकिन उनकी तलाश में दो टीमों ने जांच शुरू कर दी है।
पुलिस की एक टीम ने उस नंबर का लोकेशन ट्रेस करते हुए महाराष्ट्र की ओर टीम भेजी, जबकि दूसरी टीम जिला अस्पताल और आसपास के सीसीटीवी कैमरों की फुटेज की जांच में जुटी है। जांच में यह पता चला है कि जिस जगह पर रुपये लिए गए वहां कोई सीसी कैमरा नहीं था। जालसाज ने यह सुनिश्चित कर रखा था कि स्थान सुरक्षित हो और पहचान का खतरा न हो।
पुलिस सूत्रों के अनुसार, जालसाज ने पहले से ही स्थान की रेकी कर ली थी। जहां रुपये का लेन-देन हुआ, वह स्थल भीड़भाड़ वाला था, जिससे जालसाज की पहचान करना पुलिस के लिए चुनौतीपूर्ण साबित हो रहा है। इसके बावजूद पुलिस सभी संभावित रास्तों और आस-पास लगे कैमरों की फुटेज की पड़ताल कर रही है।
मामले के अनुसार, जालसाज ने संचालक राजेश राय को फोन कर सीएमओ कार्यालय के बाहर हनुमान मंदिर के पास बुलाया। वहीं पर उन्होंने रुपये से भरा झोला लिया और कहा कि अब आपका काम हो जाएगा। लेकिन रात में अस्पताल का लाइसेंस निरस्त हो गया, जिससे संचालक को घटना की सच्चाई का पता चला।
जब सीएमओ को अपने नाम का दुरुपयोग होने की जानकारी मिली, तब उन्होंने कैंट थाने में शिकायत दर्ज कराई। हालांकि केस में वसूली का सीधे जिक्र नहीं किया गया। वहीं, हाॅस्पिटल संचालक ने आईजीआरएस पर भी शिकायत दर्ज कराई और बताया कि पूरी घटना सीएमओ कार्यालय के सीसीटीवी में कैद हो सकती है।
पुलिस की प्रारंभिक जांच में यह भी पता चला है कि जिस स्थान पर रुपये लिए गए वहां कोई कैमरा नहीं था। जालसाज को पूरी तरह जानकारी थी कि कहां कैमरा है और कहां नहीं। इस कारण, पुलिस अब उस रास्ते के सभी कैमरों की फुटेज और सुरक्षा कैमरों के अन्य क्लू को खंगाल रही है।
इसके अलावा, जिस नंबर से कॉल की गई थी वह महाराष्ट्र में सक्रिय था। पुलिस ने एक टीम भेजकर वहां भी जालसाज की तलाश शुरू कर दी है। अधिकारियों का दावा है कि जल्द ही कॉल करने वाले जालसाजों को पकड़ लिया जाएगा।