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Gorakhpur News: चायपत्ती में मिलावट का 36 साल पुराना केस अभी कोर्ट में...अब सैंपल खराब

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गोरखपुर। खाद्य सुरक्षा विभाग के कार्यालय में सैंपल रखने की व्यवस्था बदहाल है। हालात ये हैं कि मिलावट के मामले अभी कोर्ट में विचाराधीन हैं, लेकिन कई के सैंपल ही खराब हो गए हैं। तकरीबन 36 साल पहले चौरीचौरा क्षेत्र में मिलावटी चायपत्ती की खेप पकड़ी गई। इस मामले में दुकानदार सुनील के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई और अभी भी सिविल कोर्ट में मामले की सुनवाई चल रही है, लेकिन तब लिया गया सैंपल अब सड़ गया है।
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यह हाल तब है कि जब सुनवाई के दौरान कोर्ट कभी भी सैंपल मंगा सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि ऐसे मामलों में आरोपी को इसका फायदा मिल सकता है।

ये बस बानगीभर है। बहुत सारे ऐसे मामले हैं, जिनकी कोर्ट में लंबे समय से सुनवाई चल रही है। कुछ ऐसे भी हैं, जिनमें कोर्ट ने सुनवाई पूरी कर आदेश पारित कर दिया है लेकिन इनके भी सैंपल आलमारी और बक्शे में रखे हुए हैं। इसकी वजह से जिन सैंपल को सुरक्षित रखना चाहिए, वे बेतरतीब तरीके से एक कमरे में रखने पड़ रहे हैं।
पिपराइच में ही वर्ष 2008 में एक दुकान पर पैकेटबंद नमकीन का नमूना फेल मिला था। खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम के 7/16 जीएफए एक्ट के तहत दयाशंकर गुप्ता के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज हुई। इस मामले की सुनवाई पूरी हो गई है लेकिन सैंपल विभाग में मौजूद है। नियमत: इसे नष्ट करा देना चाहिए।
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वर्ष 2006 में नया खाद्य सुरक्षा मानक अधिनियम लाया गया। पूरी तरह से 2012 में पूरी तरह से लागू हो पाया। उसी दौरान जिले में विभाग का दफ्तर भी खुला। इसके पहले यह सीएमओ कार्यालय के अधीन था। 2012 के बाद मिलावट के मामले में करीब 1300 एफआईआर हुई है और इनके सैंपल लिए गए। इसके पहले के भी 2000 से ज्यादा सैंपल सीएमओ कार्यालय से भेजे गए। इनमें अभी तक 1400 से ज्यादा मामलों की सुनवाई कोर्ट में चल रही है।
सहायक आयुक्त, खाद्य एवं औषधि सुरक्षा डॉ सुधीर कुमार सिंह ने बताया कि नए अधिनियम के मुताबिक, अब एक महीने में ही सैंपल को चैलेंज करना है। जिन मामलों में लैब की रिपोर्ट पॉजीटिव है, उसके सैंपल रखने पड़ते हैं। सैंपल के बेहतर रख-रखाव की व्यवस्था जल्द कर ली जाएगी।
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