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Gorakhpur News: हॉलमार्क से बहुत मजबूत था पीढ़ी दर पीढ़ी का भरोसा, नकली सोना बेचने का चल रहा खेल

Sat, 15 Apr 2023 04:51 PM IST
vivek shukla संवाद न्यूज एजेंसी, गोरखपुर।

सार

सराफा बाजार में पिछले दिनों फर्जी हॉलमार्किंग वाले ज्वेलर्स पर कार्रवाई हुई थी। लेकिन, मुकदमा दर्ज होने के बाद अब मामला शांत हो गया। चर्चा है कि सिर्फ एक सराफा व्यापारी पर ही कार्रवाई हुई है। जबकि, आभूषण कहां तैयार किया गया? किन कारीगरों ने इसे बनाया? इसपर न तो पुलिस कार्रवाई कर सकी और न ही इन्हें खोज सकी।
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75 वर्ष के रामनाथ वर्मा पर ग्राहकों का जो विश्वास बना है, उसे अपने सामने अपने बेटे को सौंप रहे। - फोटो : अमर उजाला।
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विस्तार
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किसी भी कारोबार की कामयाबी के लिए सबसे जरूरी है विश्वसनीयता। वर्षों पहले बना ये विश्वास आज संबंधों का हॉलमार्क है। तभी तो पीढि़यां गुजरती गईं, लेकिन आज भी सिर्फ उसी भरोसे के नाम पर आभूषणों की खरीदारी होती है। भरोसा भी ऐसा कि खुद खरीदारी करने के साथ अपने संबंधियों को भी प्रेरित करते हैं।

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सराफा कारोबारी भी मानते हैं कि पूरा बाजार भरोसे पर ही टिका है। जहां, जिसका भरोसा कायम है, ग्राहक वहीं आते हैं। सीताराम गणेश प्रसाद ज्वेलर्स के निदेशक गणेश वर्मा कहते हैं, आभूषण के कारोबार में भरोसा सबसे बड़ी चीज है। इसकी बुनियाद पर ही कारोबार टिका होता है। ग्राहकों के साथ सराफा बाजार का रिश्ता जितना घनिष्ठ और मजबूत होगा, कारोबार में तरक्की भी उतनी होगी। मुश्किल समय में यही काम भी आते हैं।

गोयल ज्वेलर्स के पंकज गोयल का कहना है कि सोने-चांदी के गहनों में गुणवत्ता व शुद्धता पहले विश्वास पर ही टिकी थी। यही विश्वास ही हॉलमार्क था। लेकिन, बाजार में गलत कारोबार करने वालों के नाम भी सामने आ रहे हैं। प्रशासन अपने स्तर से अगर सख्ती से कार्रवाई करे तो यकीनन ये गलत व्यापार करने वाले बाजार से दूर हो जाएंगे। लोगों का विश्वास एक बार फिर उनके आभूषणों का हॉलमार्क बन जाएगा।

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तस्करी और फर्जी हॉलमार्क वालों पर जिम्मेदार चुप

सराफा बाजार में एक तरफ विश्वास की कसौटी पर खरा उतरने वाले 90 प्रतिशत पुराने दुकानदार हैं। जबकि, कई व्यापारी पिछले दस से पंद्रह वर्ष से बाजार में आए हैं। इधर, ये बाजार में आए और फर्जी हॉलमार्किंग का खेल शुरू हो गया। पिछले दिनों हुई कार्रवाई के बाद अगर प्रशासन सख्ती करता तो अभी तक कई और नाम सामने आ गए होते। चर्चा है कि सराफा बाजार में एक ज्वेलर्स पर डीआरआई ने कार्रवाई की। मुकदमा भी दर्ज किया। लेकिन, ठोस नतीजा नहीं निकला। कार्रवाई के इन तौर तरीकों से फर्जी हॉलमार्क से व्यापार करने वालों को बढ़ावा मिल रहा है।

तो क्या अब भी जारी है फर्जी हॉलमार्क का खेल?
सराफा बाजार में पिछले दिनों फर्जी हॉलमार्किंग वाले ज्वेलर्स पर कार्रवाई हुई थी। लेकिन, मुकदमा दर्ज होने के बाद अब मामला शांत हो गया। चर्चा है कि सिर्फ एक सराफा व्यापारी पर ही कार्रवाई हुई है। जबकि, आभूषण कहां तैयार किया गया? किन कारीगरों ने इसे बनाया? इसपर न तो पुलिस कार्रवाई कर सकी और न ही इन्हें खोज सकी। सोने-चांदी की फर्जी हॉलमार्किंग के बाद डीआरआई भी शांत है। ऐसे में आशंका है कि ये बाजार ऐसे ही चल रहा है और दूसरा अमर जौहरी तैयार हो रहा है।

केस 1
ओंकारनाथ सिंह के पिता दिवंगत रामनिवास सिंह 1998 से सराफा बाजार के गोयल ज्वेलर्स के यहां से आभूषणों की खरीदारी करते थे। अब, तीसरी पीढ़ी में उनके नाती अंशुमान भी अपनी पत्नी संग खरीदारी करने यहीं आते हैं। विश्वास की कड़ी है कि बेटे की ससुराल पक्ष की खरीदारी भी इसी दुकान से होती है।

केस 2
सीताराम गणेश प्रसाद ज्वेलर्स की दुकान पर खरीदारी कर रहे ऊंचवा के रहने वाले इंजीनियर नरेंद्र गुप्ता ने बताया कि अपने लिए तो विश्वास ही हॉलमार्क है। पहले बाबा दिवंगत छेदीलाल गुप्ता, फिर पिता मुरारी लाल और अब वह खुद यहीं से खरीदारी करते हैं। बेटा अंचित्य भी विश्वास की धरोहर को समझ चुका है।

केस 3
तुर्कमानपुर की रीता सिंह की शादी करीब 22 वर्ष पहले हुई थी। विवाह के पहले से ही ससुराल पक्ष हिंदी बाजार में विष्णुशंकर ज्वेलर्स के यहां से आभूषणों की खरीदारी करता था। ये सिलसिला आज भी चल रहा। विश्वास की डोर इतनी मजबूत है कि मायका पक्ष और दूसरे रिश्तेदार भी उसी दुकान पर आते हैं।


 
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