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Gorakhpur News: पानी के प्लांट और सरकारी नौकरी के नाम पर 85 लाख की ठगी

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बैंक से सब्सिडी पर लोन दिलाने और नौकरी लगाने का दिया था झांसा, प्राथमिकी दर्ज
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आरोपियों में दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और बिहार के सात आरोपी शामिल

गोरखपुर। गुलरिहा थाना क्षेत्र में पानी का प्लांट लगवाने, बैंक से सब्सिडी पर बड़ा ऋण दिलाने और सरकारी नौकरी लगवाने के नाम पर करीब 85 लाख रुपये की ठगी का मामला सामने आया है। पीड़ित की शिकायत पर पुलिस ने दिल्ली, नोएडा, गुरुग्राम, गाजियाबाद और बिहार के सात आरोपियों के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज कर मामले की जांच शुरू कर दी है।
पीड़ित का आरोप है कि जालसाजों ने खुद को बैंक अधिकारी और प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताकर कई वर्षों तक झांसे में रखा और फर्जी दस्तावेज देकर रकम ऐंठ ली।
गगहा क्षेत्र के भरवलिया निवासी शिवप्रकाश ने पुलिस को दी तहरीर में बताया कि वर्ष 2018 में वह पानी का प्लांट लगाने के संबंध में जानकारी लेने नोएडा गए थे। इसी दौरान उनकी मुलाकात अजीत सिंह नामक व्यक्ति से हुई। अजीत सिंह ने खुद को प्रभावशाली लोगों से जुड़ा बताया और अपनी पत्नी मुकेशलता, बहनोई रवि तथा राजेश कुमार को भारतीय स्टेट बैंक में वरिष्ठ पदों पर कार्यरत बताया।
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आरोप है कि जालसाजों ने बैंक से करीब एक करोड़ रुपये का ऋण 50 प्रतिशत सब्सिडी पर दिलाने का भरोसा दिया। इसके बदले उच्च अधिकारियों को पैसा देने की बात कही। पीड़ित के मुताबिक, आरोपियों के कहने पर गुलरिहा क्षेत्र के जैनपुर टोला माधोपुर स्थित जमीन का निरीक्षण कराया गया। इसके बाद पहली किस्त के रूप में करीब 10 लाख रुपये नकद दिए गए। कुछ समय बाद आरोपियों ने सरकारी नौकरी दिलाने का भी झांसा दिया।
इसके लिए अलग-अलग खातों और नकद माध्यम से रुपये लिए गए। नीरज सुधांशु के खाते में भी रकम ट्रांसफर कराई गई। झांसे में आकर पीड़ित और उसके साथियों ने कई बार भुगतान किया। आरोप है कि कुल मिलाकर करीब 85 लाख रुपये दिए गए।
गुलरिहा पुलिस ने एसएसपी के आदेश पर रोशन गार्डन नजफगढ़ साउथ वेस्ट दिल्ली निवासी अजीत सिंह, उसकी पत्नी मुकेशलता, गुरुग्राम निवासी रवि कटारिया, छावला दक्षिण-पूर्व दिल्ली निवासी राजेश कुमार, सेक्टर-48 नोएडा निवासी रमन बग्गा, इंदिरापुरम गाजियाबाद निवासी नीरज सुधांशु और बिहार के गोपालगंज निवासी पप्पू यादव के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी, धमकी समेत अन्य धाराओं में प्राथमिकी दर्ज की है।
जांच में फर्जी निकले लोन और नियुक्ति पत्र
तहरीर के अनुसार, आरोपियों ने बाद में लखनऊ सचिवालय बुलाकर ऋण स्वीकृति पत्र और नौकरी से संबंधित नियुक्ति पत्र भी दिए। जब इन दस्तावेजों की संबंधित विभागों और बैंक में जांच कराई गई तो सभी कागजात फर्जी और कूटरचित पाए गए। इसके बाद पीड़ित ने आरोपियों से संपर्क किया, लेकिन वे लगातार टालमटोल करते रहे। बाद में जानकारी मिली कि आरोपी इस तरह के अन्य मामलों में जेल भी जा चुके हैं।
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85 लाख का चेक भी निकला फर्जी
पीड़ित का आरोप है कि मार्च 2024 में आरोपियों ने गोरखपुर के एक होटल में बुलाकर रुपये लौटाने का भरोसा दिया। इस दौरान 85 लाख रुपये का एक चेक भी सौंपा गया, लेकिन जांच में वह भी फर्जी निकला। रुपये वापस मांगने पर आरोपियों ने जान से मारने और झूठे मुकदमे में फंसाने की धमकी दी।
वर्जन
मामले में प्राथमिकी दर्ज कर जांच शुरू कर दी गई है। साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
-निमिष पाटील, एसपी सिटी
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