जेल प्रशासन का कहना है कि अब तक 65 बंदी कोरोना पॉजिटिव मिल चुके हैं। जिसमें 18 बंदी दस दिन का आइसोलेशन पूरा कर स्वस्थ हो चुके हैं और उन्हें संबंधित बैरक में शिफ्ट कर दिया गया है। जेल में बंदियों के उपचार के लिए जिला अस्पताल के तीन डॉक्टरों की टीम तैनात है।
अस्पताल में तब्दील हुआ बैरक नंबर 18
जेल कारागार में एक साथ कई बंदियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद उनके इलाज की सबसे बड़ी चुनौती थी। उन्हें अस्पताल या मेडिकल कॉलेज में भर्ती किया जाता तो सुरक्षा के अलग से इंतजाम करने होते। ऐसे में जिला प्रशासन की अनुमति से जेल की बैरक नंबर 18 को ही एल-वन अस्पताल में तब्दील कर दिया गया। वर्तमान में यहां 47 बंदियों का उपचार चल रहा है।
पूरी जेल का कराया गया सैनिटाइजेशन
जेल में इस समय करीब साढ़े बारह सौ बंदी रखे गए हैं। बीते कुछ दिनों के भीतर 65 बंदियों के कोरोना पॉजिटिव मिलने के बाद बाकी के बंदियों को संक्रमण से बचाए रखने की चुनौती खड़ी हो गई। ऐसे में बंदियों के कोरोना टेस्ट के साथ-साथ पूरी जेल का सैनिटाइजेशन कराया गया और कोविड गाइडलाइन का सख्ती से पालन कराने पर जोर दिया गया।
जेल प्रशासन अब पेशी से लौटने वाले हर बंदी की कोरोना जांच करा रहा है। इसके साथ ही यह भी व्यवस्था की गई है कि पेशी से लौटे बंदी की जब तक कोरोना रिपोर्ट निगेटिव न आए, तब तक उसे अलग बैरक में रखा जाए। इसके लिए अलग बैरक की व्यवस्था की गई है।
दूर से हो रही मुलाकात
जेल प्रशासन दूर-दराज से आने वाले मुलाकातियों को बंदियों से दूर से ही मुलाकात करा रहा है। वहीं मुलाकात के दौरान मास्क और सैनिटाइजर का प्रयोग कराया जा रहा है। वहीं, जो बंदी कोरोना पॉजिटिव पाए जा चुके हैं, उनके परिजनों को फिलहाल मिलने पर रोक लगा दी गई है।
दिसंबर में सभी की रिपोर्ट थी निगेटिव
जेलर सतीश चंद्र त्रिपाठी ने बताया कि 26 दिसंबर से लेकर चार जनवरी के भी जेल में रखे गए सभी 1248 बंदियों की कोरोना जांच कराई गई थी। जिसमें सभी की रिपोर्ट निगेटिव आई थी। अब जेल में फिर से सभी को कोरोना टेस्ट कराया जा रहा है।