गोरखपुर में मारपीट के मामलों में अब मेडिकल रिपोर्ट की अड़चन को पुलिस ने दूर कर दिया, लेकिन स्वास्थ्य महकमा अब भी बेखबर है। डीआईजी जे. रविंद्र ने मामले का संज्ञान लिया और मारपीट के गंभीर मामलों में अपराध के हिसाब से कार्रवाई का आदेश जारी किया था।
इसका असर रहा कि पुलिस मेडिकल रिपोर्ट का हवाला देकर मामले को टालने की जगह मानव जीवन को संकट में डालने की धारा 308 के तहत केस दर्ज कर रही है और आरोपी को कोर्ट में पेश कर जेल भिजवा रही है। अब बदमाशों को सीटी स्कैन मशीन खराब होने का फायदा नहीं मिल पा रहा।
जानकारी के मुताबिक, 10 सितंबर से (50 दिनों से अधिक) जिला अस्पताल की सीटी स्कैन मशीन खराब है। इस वजह से आम मरीजों के साथ ही पुलिस केस में भी परेशानी हो रही थी। आम मरीज तो फिर भी महंगे में बाहर से जांच करा ले रहे थे, लेकिन मेडिकल रिपोर्ट सरकारी मशीन की मान्य होने की वजह से परेशान घूम रहे हैं।
दूसरे, मारपीट के गंभीर मामलों में भी पुलिस मारपीट का केस दर्ज कर आरोपी का शांतिभंग में चालान कर देती थी। जिससे तुरंत ही जमानत मिल जाती है। मामले को अमर उजाला ने उठाया तो डीआईजी ने संज्ञान लेकर रेंज के सभी एसपी (गोरखपुर, देवरिया, कुशीनगर, महराजगंज) को पत्र लिखकर मारपीट के मामलों में चोट को देखते हुए जांच के आधार पर धारा लगाकर कार्रवाई करने का निर्देश दिया था। इसके बाद पुलिस ने आदेश का पालन भी शुरू कर दिया है।
केस एक
गोला इलाके में सोमवार को हुई मारपीट के मामले में पुलिस मारपीट, धमकी (धारा 323, 504, 427, 324) के साथ ही मानव जीवन को संकट में डालने की धारा 308 भी लगा दी। इसका असर रहा कि पकड़े गए आरोपी अमित कुमार को जमानत नहीं मिल पाई और जेल भेजा गया।
केस दो
गगहा इलाके में रविवार को हुई मारपीट के मामले में भी पुलिस ने मारपीट व धमकी (धारा 323, 504, 506) के साथ ही मानव जीवन को संकट में डालने की धारा 308 लगाया। अभियुक्त गगहा के गुरम्ही निवासी अमित कुमार उर्फ अमिताभ को कोर्ट में पेश कर जेल भेजा।
डीआईजी जे. रविंद्र गौड़ ने कहा कि पुलिस को निर्देशित किया गया है कि मारपीट के मामलों में साक्ष्यों के आधार पर धारा लगाकर कार्रवाई करें। किसी भी कीमत पर बदमाश को मशीन खराब होने का फायदा नहीं मिलना चाहिए। इसकी नियमित मॉनिटरिंग भी पुलिस अफसर करेंगे। कहीं शिकायत आई तो कार्रवाई की जाएगी।