महेवा में 300 घर बाढ़ के पानी से घिरे, सब्जियों की खेती डूबी
लगातार बढ़ रहे राप्ती के जलस्तर से बढ़ी लोगों की मुश्किलें
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। राप्ती नदी का जलस्तर बढ़ने से बाढ़ प्रभावित गांवों की संख्या अब बढ़कर 28 हो गई है। चार नए गांव शनिवार को बाढ़ से घिर गए। शहर से सटे महेवा में करीब 300 घर बाढ़ के पानी से घिर गए हैं। यहां कई मकानों में बाढ का पानी घुस गया है। यहां के लोग दिन में ऊंची जगहों पर रह रहे हैं और रात में रखवाली करने के लिए घर की छतों पर सो रहे हैं।
महेवा में बाढ़ का पानी तेजी से बढ़ रहा है। चकरा अव्वल में ही 50 से ज्यादा मकान-दुकानों में बाढ़ का पानी घुस गया है। इस इलाके में बड़े पैमाने पर अमरूद के बगीचे हैं और लोग सब्जियों की खेती भी करते हैं। खेत और बगीचे डूबने की वजह से स्थानीय लोगों की रोजी-रोटी पर संकट खड़ा गया है।
चकरा अव्वल गांव में विशाल किराने की छोटी से दुकान चलाते हैं। दुकान के चारों ओर पानी भर जाने के कारण उसे बंद कर दिया है। अब सड़क किनारे तख्त पर बैठकर कुछ सामान रखकर दुकान चला रहे हैं। वह बताते हैं कि लगातार तीसरे दिन क्षेत्र में बाढ़ का पानी बढ़ रहा है। अभी तक यहां पर कोई जनप्रतिनिधि नहीं आया है।
डूब गए खेत और बगीचे
चकरा अव्वल के मुन्नु निषाद ने 40,000 हजार रुपये में एक बगीचा किराए पर लिया था। यहां उन्होंने सब्जियों की खेती भी की थी। अब बाढ़ के पानी में पूरा बगीचा घिर गया और चार फीट तक पानी लगा हुआ है। मुन्नु का कहना है कि यदि नदी का पानी जल्द नहीं हटा तो सारी लागत डूब जाएगी। मुन्नु की तरह दर्जनों लोग बाढ़ से आर्थिक नुकसान झेल रहे हैं। अनिल सोनकर, हरिशचंद्र पासवान और अभिषेक ने बताया कि उनके घरों में 4 फीट तक पानी लग गया है। अभी तक प्रशासन से हमें कोई राहत नहीं मिली है।
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कोट
बाढ़ के कारण महेवा में करीब 300 घर डूब गए हैं, मेरा कार्यालय भी डूब गया है। प्रशासन ने मुझसे प्रभावित लोगों की सूची मांगी है। मैं सूची तैयार करके जल्दी ही प्रशासन को सौंप दूंगा।
पार्षद, छोटे लाल गुप्ता