सीएमओ डॉ. आशुतोष कुमार दुबे ने बताया कि पहली बार प्रदेश में सर्वाइकल कैंसर का टीका बेटियों को लगाया जाएगा। इसके लिए बीआरडी मेडिकल काॅलेज को नोडल केंद्र बनाया गया है। इसकी प्रभारी डॉ. रीना श्रीवास्तव बनाई गई हैं, जो इस टीके को लगाने का प्रशिक्षण देंगी। यह स्वदेशी टीका मानव पेपिलोमावायरस जल्द ही नियमित टीकाकरण अभियान में शामिल हो सकता है। क्योंकि, यह टीके काफी महंगे हैं।
हर साल एक लाख 20 हजार बच्चों का होता है जन्म
जिले की बात करें तो हर साल एक लाख 20 हजार बच्चों का जन्म होता है। इनमें शुरुआती दौर में केवल 60 फीसदी बच्चों को नियमित टीकाकरण हो पाता है। इस साल के आंकड़ों की बात करें तो करीब 62 फीसदी बच्चों को ही टीका लग सका है। 38 फीसदी बच्चे अभी भी टीकाकरण से वंचित है। इन बच्चों का विशेष टीकाकरण अभियान के तहत टीका लगाने की योजना है।
यह टीके हैं जरूरी
- बच्चे के जन्म पर बीसीजी, हेपेटाइटिस-बी एवं पोलियो की जीरो डोज।
- बच्चे के डेढ़ महीने का होने पर पेंटावैलेट एक, ओपीवी एक, एफआईवीपी एक, रोटा एक एवं पीसीवी एक लगेगा।
- बच्चे के ढाई महीने का होने पर पेंटावेलेट दो, ओपीवी दो और रोटा दो लगेगा।
- बच्चे के साढ़े तीन महीने का होने पर पेंटावेलेट तीन, ओपीवी तीन, एफआईपीवी दो, रोटा तीन एवं पीसीवी दो लगेगा।
- बच्चे को नौ से बारह महीने की उम्र में एमआर एवं जेई पहला टीका, पीसीवी और विटामिन ए देंगे।
- 16 से 24 माह की उम्र में बच्चे को एमआर, जेई, डीपीटी, ओपीवी और विटामिन ए हर 6 माह पर 5 साल तक देंगे।
- बच्चे को पांच से छह साल की उम्र में डीपीटी दो लगेगा।
- बच्चे को 10 साल की उम्र में टीडी का टीका लगेगा।
- बच्चे को 16 साल की उम्र में टीडी।
- गर्भवती को टीडी का टीका लगता है।