- फर्माें के टर्नओवर, सप्लाई आर्डर, भुगतान आदि से संबंधित अभिलेखों की भी होगी जांच
- सीबीआई पहले ही ले चुकी है इन फर्मों का ब्योरा, अब विजिलेंस टीम भी करेगी पड़ताल
अमर उजाला ब्यूरो
गोरखपुर। रेलवे में सामान आपूर्ति करने वाली 20 फर्में विजिलेंस जांच के दायरे में आ सकती हैं। इन फर्मों की तरफ से पूर्वोत्तर रेलवे को किस सामान की कब और कितनी आपूर्ति की गई है, इससे जुड़े अभिलेख जुटाए जा रहे हैं। सीबीआई की रेड के बाद इन फर्मों की जांच पड़ताल शुरू हुई थी। इन फर्मों को कोविड कॉल से लेकर अब तक कितने सामान आपूर्ति के लिए टेंडर मिला है और कितने का भुगतान हुआ है, इन सबका रिकार्ड विजिलेंस टीम ने अपने पास रखी है।
पूर्वोत्तर रेलवे के मुख्यालय गोरखपुर के प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक कार्यालय ही सामान की खरीद-फरोख्त करता है। पिछले दिनों रेलवे को अपने वाहन किराए पर देने वाली सुक्ति फर्म के संचालक ने सीबीआई के एंटी करप्शन ब्यूरो को तहरीर देकर आरोप लगाया था कि काम के भुगतान से पहले रुपयों की डिमांड की जा रही है।
एंटी करप्शन ब्यूरो ने आरोपी प्रमुख मुख्य सामग्री प्रबंधक केसी जोशी को रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया। अब इस मामले में विजिलेंस जांच भी हो रही है। सूत्रों की माने तो सोमवार को गोरखपुर आई टीम ने सामग्री आपूर्ति करने वाली सभी फर्माें के बारे में जानकारी जुटाई।
मंगलवार को भी इस टीम ने सुबह अभिलेखों की पड़ताल की। कुछ जरूरी दस्तावेजों की फोटो भी कराई गई। दाेपहर बाद टीम वापस लौट गई। आपूर्ति करने वाली 25 फर्मों में से करीब 20 फर्में ऐसी हैं, जिन्हें लगातार सप्लाई के आर्डर मिले हैं। पांच फर्में ऐसी हैं, जिन्हें अलग-अलग सामान की आपूर्ति के लिए टेंडर मिलता रहा है। इन सब पर विजिलेंस की नजर है। इन फर्माें के चयन से लेकर भुगतान तक की बारीकी से पड़ताल चल रही है।
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जल्दी ही फिर किसी पर गिर सकती है गाज
रेलवे में सामग्री आपूर्ति के जरिए हो रही गड़बड़ी पर सीबीआई की टीम ने नजर गड़ा दी है। तीन दिन पहले एक टीम गोरखपुर आई थी, जिसने अपना जाल बिछाया, लेकिन सफलता नहीं मिली। इसके बाद टीम लौट गई है। इस टीम के संपर्क में रहे सूत्र का कहना है कि पिछली कार्रवाई के बाद से अफसर और कर्मचारी अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं। इसीलिए टीम अब नई प्लानिंग कर रही है।
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