डॉ अमरेश सिंह ने बताया कि एंटीजन किट से जांच बेहद सस्ती है। एक किट की कीमत करीब 500 रुपये के आसपास है। इसमें समय की भी बचत है। इसकी रिपोर्ट महज पांच से 10 मिनट के अंदर पता चल जाती है। हालांकि इसकी रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक अब तक सही आंकी गई है।
यह एक अच्छी बात है, क्योंकि कंपनी ने 65 से 70 फीसदी तक रिपोर्ट की प्रमाणिकता की बात कही थी। वहीं, आरपीटीसीआर से जांच में करीब 1500 रुपये का खर्च आता है। इसकी रिपोर्ट 99 प्रतिशत तक सही है। एक जांच में करीब दो से तीन घंटे लग जाते हैं।
एंटीजन टेस्ट को इस तरह समझें
एंटीजन किट से जांच के जरिए यह पता लगाया जाता है कि संबंधित व्यक्ति में वायरस का कोई प्रोटीन तो नहीं। यदि वह मौजूद रहता है तो रिपोर्ट पॉजिटिव आ जाती है। लेकिन इसकी प्रमाणिकता थोड़ी कम होती है। यही वजह है कि निगेटिव आने पर आरटीपीसीआर से भी जांच होती है।
आरटीपीसीआर या रियल टाइम पीसीआर टेस्ट के लिए स्वाब सैंपल लिया जाता है। इससे शरीर में वायरस आरएनए जीनोम का पता लगाया जाता है। नाक और गले के दो ऐसे हिस्से होते हैं, जहां पर वायरस के मौजूद होने की आशंका सबसे अधिक रहती है। स्वैब से इन्हीं कोशिकाओं के जरिए वायरस का पता लगाया जाता है। स्वैब की जांच आरटीपीसीआर मशीन से होती है।
बीआरडी मेडिकल कॉलेज के माइक्रोबायोलॉजी विभागाध्यक्ष डॉ अमरेश सिंह ने कि एंटीजन किट की जांच और आरटीपीसीआर की जांच में जमीन आसमान का अंतर है। एंटीजन की जांच में रिपोर्ट 85 प्रतिशत तक सही आंकी गई है। यही वजह है कि एंटीजन से निगेटिव आने वालों की जांच आरटीपीसीआर से की जा रही है। जबकि आरटीपीसीआर की जांच 99 प्रतिशत तक सही है। आरटीपीसीआर की जांच पर भरोसा ज्यादा है।