राशन बंटने के दौरान एकत्रित हुए लोग। (फाइल फोटो)
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बीते तीन माह में सत्यापन के दौरान जिले में 17863 राशनकार्ड धारक मिले अपात्र, ग्रामीण क्षेत्रों में 13,515 और शहर में 4348 राशनकार्ड धारक अपात्र पाए गए हैं। गोरखपुर जिले के गांवों में नए प्रधान बनने के बाद खाद्य आपूर्ति विभाग के सत्यापन में 13,515 राशनकार्ड धारक अपात्र पाए गए हैं।
ये सभी बीते पांच वर्ष या उससे अधिक समय से सस्ती दर अथवा मुफ्त खाद्यान्न का लाभ ले रहे थे। शहरी क्षेत्र में भी 4348 परिवार अपात्र पाए गए हैं। सभी राशनकार्ड निरस्त कर नए परिवारों को लाभार्थी सूची में शामिल किया गया है।
जानकारी के मुताबिक, मई में ग्राम पंचायत का चुनाव होने के बाद जिला खाद्य आपूर्ति विभाग के पास अपात्र लोगों को राशन कार्ड जारी किए जाने की शिकायतें बढ़ने लगीं। विभाग के रिकॉर्ड के मुताबिक बहुत से नवनिर्वाचित ग्राम प्रधानों ने कोटेदार और राशनकार्ड धारकों के खिलाफ जांच और कार्रवाई करने की मांग की। इस पर तत्कालीन जिला पूर्ति अधिकारी आनंद सिंह ने राशनकार्ड धारकों का सत्यापन शुरू कराया था। सत्यापन अभियान में जून से अगस्त के बीच ग्रामीण इलाके में 13,515 परिवार अपात्र पाए गए। इनमें से अधिकतर के राशन कार्ड बीते पांच वर्ष के भीतर बनाए गए थे।
आंकड़ों के अनुसार प्रत्येक ग्राम पंचायत में औसतन 10 से 11 राशनकार्ड धारक अपात्र मिले हैं। शहरी क्षेत्र में भी 4348 राशनकार्ड धारक अपात्र मिले हैं। वरिष्ठ पूर्ति निरीक्षक अरुण सिंह ने बताया कि सत्यापन में अपात्र मिले परिवारों का राशनकार्ड निरस्त कर इतने ही नए पात्र परिवारों को राशन कार्ड जारी किया गया है। पूर्ति विभाग की ओर से चलाए गए सत्यापन अभियान को राजनीतिक जानकार गांवों में सत्ता परिवर्तन का परिणाम मानते हैं।
हालांकि अधिकारी सत्यापन अभियान को शासन की मंशा करार दे रहे हैं। जिला पूर्ति अधिकारी रामेंद्र प्रताप सिंह ने बताया कि शासन के आदेश के अनुसार सत्यापन कर अपात्रों का राशनकार्ड निरस्त करने की प्रक्रिया जारी है। अपात्रों का राशनकार्ड निरस्त कर पात्र परिवारों को लाभार्थी सूची में शामिल किए जाने का अभियान जारी रहेगा।