गोरखपुर कलेक्ट्रेट की 117 साल पुरानी इमारत तोड़ी जाने लगी है। संयुक्त कार्यालय जाने वाले रास्ते के ऊपर लगा टीन शेड बुधवार को तोड़ दिया गया। प्रशासनिक विभाग, इस कार्यालय को धीरे-धीरे शिफ्ट करने में जुटा है।
सबसे आखिरी में अपर जिलाधिकारी (एडीएम) वित्त एवं राजस्व, मुख्य राजस्व अधिकारी (सीआरओ) और सहायक अखिलेख अधिकारी (एआरओ) का कार्यालय टूटेगा। पहले ये तीनों कार्यालय भी कलेक्ट्रेट की मुख्य इमारत के साथ ही तोड़े जाने थे, मगर फरियादियों को ज्यादा दिक्कत न हो इसलिए इन्हें बाद में तोड़ने का निर्णय किया गया है। आने वाले कुछ दिनों में कलेक्ट्रेट पूरी तरह पर्यटन विभाग में शिफ्ट कर जाएगा। करीब तीन साल तक पर्यटन विभाग ही कलेक्ट्रेट का नया ठिकाना होगा।
कलेक्ट्रेट भवन का निर्माण 1903 में शुरू हुआ था और 1910 में इसे पूरा किया गया था। इसे तोड़ने पर करीब 20 लाख रुपये का खर्च आएगा। इसका टेंडर हो चुका है। एडीएम प्रशासन पुरुषोत्तम दास गुप्ता ने बताया कि कलेक्ट्रेट कार्यालय को स्थानांतरित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है। क्षेत्रीय पर्यटन कार्यालय भवन में सामान व दस्तावेज पहुंचाए जा रहे हैं। एडीएम वित्त एवं राजस्व, सीआरओ एवं एआरओ के कोर्ट अभी पुरानी जगह ही रहेंगे। प्रशासनिक अफसरों की ही तरह पुलिस अधिकारी भी अपनी नई जगह तलाश रहे हैं।
65 करोड़ से बनेगा कलेक्ट्रेट का नया एकीकृत भवन
एडीएम प्रशासन ने बताया कि कलेक्ट्रेट की पुरानी इमारत के ध्वस्तीकरण के बाद इसी स्थान पर 65 करोड़ की लागत से नया एकीकृत भवन बनाया जाएगा। सभी सुविधाओं से युक्त इस भवन में डीएम के साथ एसएसपी का कार्यालय भी होगा। नए भवन के पहले तल पर इन दोनों अफसरों के कार्यालय होंगे। दूसरे तल पर डीएम का कोर्ट होगा। 300 से अधिक चार पहिया व दो पहिया वाहनों के लिए पार्किंग की व्यवस्था होगी। कलेक्ट्रेट आने वाले दिव्यांग फरियादियों के लिए भी सुविधाएं होंगी। महिला कर्मियों व फरियादियों के लिए बच्चों को दूध पिलाने के लिए भी एक अलग कक्ष होगा।