FOMO भी बढ़ा रहा है खर्च
'क्या पता अगली हिट सीरीज इसी प्लेटफॉर्म पर आ जाए।... अगर सब देख रहे हैं, तो मैं क्यों मिस करूं?..., यही FOMO (Fear of Missing Out) यानी किसी से पीछे रहने का डर कई लोगों को एक साथ कई OTT और डिजिटल सेवाओं का सब्सक्रिप्शन लेने के लिए उकसाता है। शुरुआत में हर प्लान सस्ता लगता है, लेकिन कुछ महीनों बाद यही सब मिलकर महीने का बड़ा खर्च बन जाते हैं।
'सिर्फ 99 रुपये' वाली सोच पड़ सकती है भारी
सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर कुछ युवाओं का कहना है कि स्विगी वन, जोमैटो गोल्ड, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार, स्पॉटिफाई हर एप कहता है, 'सिर्फ 99 रुपये', 'सिर्फ 149 रुपये', 'Limited Offer', 'Free Trial'। अलग-अलग देखें तो रकम छोटी लगती है, लेकिन जब 8-10 सब्सक्रिप्शन एक साथ चलते हैं, तो हर महीने हजारों रुपये बिना जानकारी के खर्च हो जाते हैं।
एक्सपर्ट क्या कहते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि आदतों और मनोविज्ञान का मामला है। कंपनियां ऐसे ऑफर और AutoPay सिस्टम बनाती हैं, जिससे एक बार सब्सक्रिप्शन शुरू हो जाए तो उसे बंद करना लोग टालते रहते हैं। यही वजह है कि कई लोग उन एप्स के भी पैसे देते रहते हैं, जिन्हें महीनों से खोला तक नहीं होता।
कैसे बचें इस तरह के एप ट्रैप से?
- महीने में एक बार अपने बैंक का स्टेटमेंट जरूर देखें।
- AutoPay और UPI Mandate की लिस्ट चेक करें।
- जिन एप्स का इस्तेमाल नहीं करते, सब्सक्रिप्शन बंद करें।
- एक साथ कई OTT लेने से बचें, एक-एक करके इसके ले।
- Free Trial खत्म होने की तारीख का रिमाइंडर लगा लें।
- सिर्फ 99 रुपये देखकर ही कोई एप सब्सक्राइब न कर लें।