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'Only in 49': FOMO के चक्कर में एप ट्रैप में फंस रहे हैं Gen Z! छोटे-छोटे AutoPay कैसे बन रहे हैं बड़ा खर्च

Thu, 02 Jul 2026 06:57 PM IST
रिया दुबे न्यूज डेस्क, अमर उजाला

सार

Gen Z के लिए सुविधा और एक्सपीरियंस अहम हैं, लेकिन हर 'Only ₹49', 'Free Trial' और 'Limited Offer' वाकई फायदे का सौदा नहीं होता। FOMO में लिया गया एक छोटा-सा सब्सक्रिप्शन और ऑन किया गया AutoPay धीरे-धीरे बड़ा खर्च बन सकता है। आइए विस्तार से जानते हैं। 
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जेन जी - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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यार, सिर्फ 49 रुपये में तीन महीने Ad-Free! इतनी अच्छी डील छोड़नी ही क्यों?... बस यहीं से कहानी शुरू होती है। आपने ऑफर ले लिया। एप ने कहा कि AutoPay ऑन कर दीजिए, ताकि सब्सक्रिप्शन बिना रुके चलता रहे। आपने भी बिना ज्यादा सोचे 'Continue' पर टैप कर दिया। तीन महीने तक सब बढ़िया चला, लेकिन चौथे महीने ऑफर खत्म हुआ और एप ने पूरी कीमत वसूलनी शुरू कर दी। पैसे हर महीने अपने-आप कटते रहे और आपको शायद तब तक पता भी नहीं चला, जब तक बैंक स्टेटमेंट नहीं देखा।

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यही है Invisible Spending या एप ट्रैप...  ऐसा खर्च जो दिखता नहीं है, लेकिन हर महीने आपकी सैलरी का एक हिस्सा चुपचाप खा जाता है।

Gen Z क्यों सबसे ज्यादा फंस रहे हैं?

Gen Z अपने ऊपर खर्च करने से पीछे नहीं हटते। अच्छी कॉफी, फूड डिलीवरी, म्यूजिक, OTT, फिटनेस एप, प्रीमियम फीचर्स इन सबको वे खुद को पैंपर करने का तरीका मानते हैं। उनका मानना है कि मेहनत करते हैं तो अपनी छोटी-छोटी इच्छाएं पूरी करना भी जरूरी है।

साथ ही, ''Live in the Moment'' यानी आज को खुलकर जीने की सोच भी इस पीढ़ी में काफी मजबूत है। अगर कोई नई वेब सीरीज रिलीज हुई है, कोई नया म्यूजिक एप आया है या किसी एप पर Ad-Free ऑफर मिल रहा है, तो उसे तुरंत अपनाने का मन बन जाता है। परेशानी तब शुरू होती है, जब ये छोटे-छोटे फैसले हर महीने ऑटो-डेबिट में बदल जाते हैं।

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Auto Pay का जाल - फोटो : AI

FOMO भी बढ़ा रहा है खर्च

'क्या पता अगली हिट सीरीज इसी प्लेटफॉर्म पर आ जाए।... अगर सब देख रहे हैं, तो मैं क्यों मिस करूं?..., यही FOMO (Fear of Missing Out) यानी किसी से पीछे रहने का डर कई लोगों को एक साथ कई OTT और डिजिटल सेवाओं का सब्सक्रिप्शन लेने के लिए उकसाता है। शुरुआत में हर प्लान सस्ता लगता है, लेकिन कुछ महीनों बाद यही सब मिलकर महीने का बड़ा खर्च बन जाते हैं। 

'सिर्फ 99 रुपये' वाली सोच पड़ सकती है भारी

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म रेडिट पर कुछ युवाओं का कहना है कि स्विगी वन, जोमैटो गोल्ड, नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, जियोहॉटस्टार, स्पॉटिफाई हर एप कहता है, 'सिर्फ 99 रुपये', 'सिर्फ 149 रुपये', 'Limited Offer', 'Free Trial'। अलग-अलग देखें तो रकम छोटी लगती है, लेकिन जब 8-10 सब्सक्रिप्शन एक साथ चलते हैं, तो हर महीने हजारों रुपये बिना जानकारी के खर्च हो जाते हैं।
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लिमिटेड ऑफर का जाल - फोटो : Ai

एक्सपर्ट क्या कहते हैं?

विशेषज्ञों के मुताबिक, यह सिर्फ पैसों का नहीं बल्कि आदतों और मनोविज्ञान का मामला है। कंपनियां ऐसे ऑफर और AutoPay सिस्टम बनाती हैं, जिससे एक बार सब्सक्रिप्शन शुरू हो जाए तो उसे बंद करना लोग टालते रहते हैं। यही वजह है कि कई लोग उन एप्स के भी पैसे देते रहते हैं, जिन्हें महीनों से खोला तक नहीं होता।

कैसे बचें इस तरह के एप ट्रैप से?

  • महीने में एक बार अपने बैंक का स्टेटमेंट जरूर देखें।
  •  AutoPay और UPI Mandate की लिस्ट चेक करें।
  • जिन एप्स का इस्तेमाल नहीं करते, सब्सक्रिप्शन बंद करें।
  • एक साथ कई OTT लेने से बचें, एक-एक करके इसके ले।
  • Free Trial खत्म होने की तारीख का रिमाइंडर लगा लें।
  • सिर्फ 99 रुपये देखकर ही कोई एप सब्सक्राइब न कर लें।
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