इसे मॉडल्स की गलाकाट प्रतिद्वंद्विता कहें या फिर 'साइज जीरो' के पीछे का पागलपन, फैशन मैगजीन 'वोग' के कवर लायक फिगर बनाने के लिए मॉडल्स टिशु पेपर खाकर अपनी भूख मारने से भी गुरेज नहीं करतीं।
'द इंडिपेंडेंट' की एक खबर में हाल में वोग ऑस्ट्रेलिया की एडिटर इन चीफ रह चुकीं क्रिस्टी क्लेमेंट्स ने अपनी किताब 'द वोग फैक्टर' में इस बात का खुलासा किया है।
उन्होंने अपनी किताब में लिखा है कि 'वोग' के कवरशूट के लिए मॉडल्स इतनी ज्यादा दबाव और तनाव में होती हैं कि अपनी भूख पर नियंत्रण करने के लिए वह भोजन के बजाय टिशु पेपर तक खाकर डाइटिंग करती हैं।
उन्होंने मर्राकेश में हुए वोग के तीन दिन तक चलने वाले फोटोशूट का उदाहरण दिया जिसमें उन्होंने माना कि शूट के दौरान मॉडल ने आखिरी दिन तक कुछ भी नहीं खाया था जिस वजह से आखिरी दिन तक उसे खड़े होने और आंखें खोलने तक में दिक्कत महसूस हो रही थी।
क्रिस्टी ने इस पत्रिका में 25 सालों के अपने अनुभव और फैशन जगत से जुड़े कई पहलुओं को अपनी किताब में उजागर करने का दावा किया है।
उनके अनुसार, अगर डाइटिंग से मॉडल्स को साइज कम नहीं होता था तो वे ब्रेस्ट सर्जरी करवाकर खुद दुबली दिखने की कोशिश करती थीं। क्रिस्टी को 25 सालों के कार्यकाल के बाद अचानक से हटाया गया था और उनकी जगह 'हार्पर बाजार ऑस्ट्रेलिया' की पूर्व एडिटर एडविना मैक्केन को नियुक्त किया गया था।
क्रिस्टी क्लेमेंट फैशन जगत की अकेली ऐसी हस्ती नहीं हैं जिन्होंने इस बात का खुलासा किया इससे पहले वर्ष 2010 में वोग पत्रिका की कवर गर्ल रह चुकीं सुपर मॉडल एमी लेमन्स ने भी माना था कि उन्होंने ऐसी कई मॉडल्स देखी हैं जो भूख मारने के लिए जूस में रुई भिगोकर खाती थीं।