सुंदर दिखना कौन नहीं चाहता और इस चाहत में आप क्या करते हैं? अच्छे प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करते हैं, घरेलू नुस्खे आजमाते हैं और तरह-तरह के ब्यूटी ट्रीटमेंट लेते हैं।
लेकिन अपनी खूबसूरती बढ़ाने की जीतोड़ कोशिश में अक्सर इस बात पर ध्यान ही नहीं देते कि आप जिन नुस्खों से अपनी खूबसूरती बढ़ाने के चक्कर में फंसे हैं, वे असलियत में भी कारगर है या सिर्फ मिथ ही हैं।
आइए जानें आपकी त्वचा की देखभाल से जुड़े कुछ सामान्य भुलावे-
मिथ - त्वचा पर नींबू या टमाटर घिसना है फायदेमंद
सच - कई बार हम चेहरे की प्राकृतिक स्क्रबिंग करने और पिंपल फ्री दिखने के लिए चेहरे पर नींबू या टमाटर जैसे साइट्रिक फलों के स्लाइस घिसते हैं। इससे फलों का साइट्रिक एसिड सीधे त्वचा के संपर्क में आता है और त्वचा को नुकसान पहुंचा सकता है।
बजाय चेहरे पर नींबू घिसने के नींबू को ग्लीसरिन या पैक में डाइल्यूट करके लगाना त्वचा के लिए फायदेमंद होता है।
मिथ - अधिक एसपीएफ की मात्रा वाला सनस्क्रीन होगा अधिक प्रभावी
सच - सूर्य की हानिकारक अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाव के लिए सनस्क्रीन लोशन लगाते हैं और मानते हैं कि जितना ज्यादा एसपीएफ होगा, सनस्क्रीन उतना ही फायदेमंद होगा।
सच्चाई यह है कि 15 एसपीएस से लेकर 30 एसपीएफ तक की मात्रा वाले सनस्क्रीन हमारी त्वचा की जरूरतों के हिसाब से परफेक्ट होते हैं। इससे अधिक एसपीएफ की मात्रा वाले सनस्क्रीन भी उतने ही कारगर है जितने किए 15 एसपीएस से लेकर 30 एसपीएफ तक की मात्रा वाले सनस्क्रीन लोशन हैं।
मिथ - सिर्फ धूप में ही कारगर है सनस्क्रीन
सच - सनस्क्रीन अल्ट्रावॉयलेट किरणों से बचाता है लेकिन इसका मतलब यह नहीं कि आप सिर्फ धूप में निकलने के पहले ही सनस्क्रीन लगाएं। स्विमिंग के दौरान या फिर बदली भरे दिन में भी लगाना उतना ही जरूरी है जितना धूप में लगाना।
मिथ - स्क्रब और फेशियल से पिंपल दूर होते हैं
सच - अगर आप यह सोचकर स्क्रबिंग, क्लीनिंग और फेशियल पर पैसे खर्च करते हैं कि इनसे आपके पिंपल्स दूर होंगे तो यह आपकी भूल है। इससे त्वचा के पोर खुलते हैं और त्वचा अधिक सेन्सटिव हो जाती है। पिंपल्स कम होने के बजाय बढ़ जाते हैं।