हिमाचल प्रदेश में पैदा की जा रही चेरी के दामों में पिछले कई दिनों से लगातार उछाल आने से प्रदेश के चेरी उत्पादक मालामाल हो रहे हैं। जिन बागवानों ने बगीचों में चेरी के पेड़ लगाए हैं और फसल अच्छी है, उनकी किस्मत खुल गई है। इस बार चेरी के दाम पिछले साल के मुकाबले काफी ज्यादा हैं।
प्रदेश में चेरी की पैदावार कम होने से देश की मंडियों में इनके दामों में तेजी आई है। पिछले कई दिनों ने लगातार दाम बढ़ रहे हैं। थानेधार और कोटगढ़ क्षेत्र के कई गांवों में बागवानों ने सेब के साथ चेरी के पेड़ भी खासी संख्या में लगाए हैं। इन इलाकों में सेब ही बागवानों की प्रमुख फसल रही है लेकिन डेढ़ दशक से चेरी की पैदावार भी कर रहे हैं।
पिछले साल चेरी की बंपर फसल थी लेकिन चेरी के दाम काफी कम थे। पिछले साल चेरी के दाम 250 से 300 रुपये प्रति डिब्बा (प्रति एक किलोग्राम) के हिसाब से बिका था। बागवानों का कहना है कि बाजार में चेरी के दाम अच्छे मिलने से मुनाफा हो रहा है।
सोसायटी के माध्यम से भी चेरी देश की विभिन्न मंडियों में खासकर दिल्ली मंडी में पहुंचाई जा रही है। बागवान राजेश ठाकुर, अमर सिंह और प्रदीप कुमार कहते हैं कि उनको पिछले साल के मुकाबले इस साल चेरी के अच्छे दाम मिले हैं।
थानेधार क्षेत्र के खड़ाउन गांव के प्रगतिशील बागवान बृज लाल कहते हैं कि पिछले साल के मुकाबले इस बार चेरी की फसल अपेक्षाकृत काफी कम है। यही कारण है कि चेरी की फसल क्वालिटी की है और बाजार में चेरी का डिब्बा 500 से 600 रुपये बिक रहा है। दिल्ली के व्यापारी सुदर्शन कहते हैं कि चेरी के दामों में काफी उछाल है।