फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Fact Check: बांग्लादेश में बिगड़े हालत के बीच वीडियो गलत दावे के साथ वायरल, पड़ताल में जानें असली घटना

Wed, 04 Dec 2024 06:58 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है। दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश में एक बार फिर हिंदू मंदिर पर हमला किया गया।
विज्ञापन
फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। वीडियो में हम कुछ लोगों को एक पंखुड़ी के शेड और एक दीवार पर लाठी से हमला करते हुए देख सकते हैं।
विज्ञापन


क्या है दावा 
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि बांग्लादेश में एक हिंदू मंदिर में तोड़फोड़ की जा रही है। एक हिंदू आध्यात्मिक नेता की गिरफ्तारी के बाद बांग्लादेश में दंगे भड़क गए और वीडियो वायरल हो गया। 

तथवम-असी (@ssaratht) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “बांग्लादेश में हिंदुओं की स्थिति बहुत खराब है। इजलामी लोग हिंदुओं के घरों, हिंदू मंदिरों और हिंदू प्रतिष्ठानों पर हमला कर रहे हैं और तोड़फोड़ कर रहे हैं। भारत में हिंदुओं को यह जरूर देखना चाहिए। (पोस्ट का आर्काइव लिंक)
विज्ञापन

 

जितेन्द्र प्रताप सिंह (@jpsin1) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “देखिए कल बांग्लादेश के अलग-अलग शहरों में किस तरह हिंदू मंदिरों में तोड़फोड़ की गई और हिंदू श्रद्धालुओं को पीटा गया। लेकिन बांग्लादेश में हिंदुओं के नरसंहार पर पूरी दुनिया चुप है।” (पोस्ट का आर्काइव लिंक)
 

इसी तरह के कई और दावे आप यहां और यहां देख सकते है। 

पड़ताल
दावे की सच्चाई पता लगाने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें अगस्त 2024 का एक फेसबुक पोस्ट मिला, जिसमें वायरल वीडियो से मिलते-जुलते चीजें थी। पोस्ट में बताया गया कि अली पागला की दरगाह को तोड़ा जा रहा है। 

मेट्रो टीवी समाचार पोर्टल ने 29 अगस्त, 2024 को यूट्यूब में एक वीडियो प्रकाशित किया गया। खबर के अनुसार, यह घटना काजीपुर के सिराजगंज में अली पगोल मजहर में हुई थी। लोकल मीडिया से पता चला कि शालग्राम जामे मस्जिद के इमाम घोलम रब्बानी ने कथित तौर पर तोड़फोड़ के लिए भीड़ का नेतृत्व किया था। रब्बानी ने दरगाह पर नशीली दवाओं की गतिविधि से जुड़े होने का आरोप लगाया था और 100 से अधिक व्यक्तियों को हथौड़ों, कुदालों और फावड़ियों का उपयोग करके इसे नष्ट करने के लिए उकसाया था। वायरल दावों के विपरीत, किसी भी रिपोर्ट में इस घटना में हिंदू के शामिल होने का संकेत नहीं दिया गया। 

बांग्लादेशी मीडिया कलेर कोंथो ने बताया कि काजीपुर पुलिस स्टेशन के प्रभारी शाहिदुल इस्लाम ने दरगाह में तोड़फोड़ का संज्ञान लिया है।

पड़ताल का नतीजा 
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि बांग्लादेश में हिंदू मंदिर को तोड़े जावे वाला दावा भ्रामक है। 
 
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें