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Fact Check: 2017 में यूपी पुलिस की प्रताड़ना के वीडियो को अभी का बताकर किया जा रहा शेयर, पढ़ें पड़ताल

Thu, 05 Jun 2025 06:56 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है। वीडियो में पुलिस एक व्यक्ति को बुरी तरह पीट रही है। दावा किया जा रहा है कि यूपी में भाजपा सरकार के राज में पुलिस ने युवक को प्रताड़ित किया है। हमारी पड़ताल में यह वीडियो सात साल पुराना निकला। 

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, वीडियो में दिख रहा है कि दो पुलिस अधिकारी एक व्यक्ति को बुरी तरह से पीटकर प्रताड़ित कर रहे हैं। इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि यह वीडियो उत्तर प्रदेश का है। जहां योगी सरकार के आने के बाद पुलिस के अत्याचार बढ़ चुके हैं। भाजपा पर निशाना साधते हुए कहा जा रहा है कि जनता पर दिन प्रतिदिन अत्याचार बढ़ता जा रहा है।

 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में इस दावे को गलत पाया है। जांच में पाया गया कि वीडियो 2017 है। वीडियो का हाल की किसी घटना से कोई लेना देना नहीं है। 2017 में उत्तर प्रदेश के महाराजगंज में चोरी के मामले में पकड़े गए एक नाबालिग को थाने के अंदर प्रताड़ित किया गया था। हालांकि मामला उत्तर प्रदेश का ही था। इसके बाद एक स्टेशन हाउस ऑफिसर (एसएचओ) को निलंबित कर दिया गया।

क्या है दावा

इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि उत्तर प्रदेश में योगी सरकार के राज में आम जनता पर अत्याचार हो रहा है। पुलिस थाने में आम लोगों को भाजपा की सरकार में प्रताड़ित किया जा रहा है। 

समाजवादी प्रहरी (@SP_Prahari) नाम के एक एक्स यूजर ने इस वीडियो को शेयर करके लिखा “ये योगी जी का उत्तर प्रदेश है यूपी पुलिस और योगी जी की पुलिस है जो जनता पर कर रही है अत्याचार। पोस्ट का लिंक और आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।  

  इस तरह के कई और दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इसके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। 

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें इस वीडियो से संबंधित एक मीडिया रिपोर्ट मिली। 18 नवंबर 2017 को छपी एनडीटीवी की इस रिपोर्ट में बताया गया था कि “यह घटना सितंबर में महाराजगंज के पनियरा नामक एक पुलिस स्टेशन में हुई थी  महाराजगंज के अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक आशुतोष शुक्ला ने कहा, "पुलिस वाले लड़के को पीटने और उसके द्वारा कथित रूप से चुराई गई वस्तुओं को बरामद करने की कोशिश कर रहे थे। उन्हें उसके पास से कोई वस्तु नहीं मिली, इसलिए उसे छोड़ दिया गया। हमने संबंधित पुलिसकर्मी, सब इंस्पेक्टर को निलंबित कर दिया है और विस्तृत जांच के बाद हम आगे की कार्रवाई करेंगे।" लड़के पर उसके गांव की एक महिला ने चोरी का आरोप लगाया था और उसके खिलाफ शिकायत दर्ज होने के बाद, उसे पुलिस ने हिरासत में ले लिया और पूछताछ के लिए थाने ले आई।” 

 

आगे कीवर्ड से सर्च करने पर हमें इस मामले से जुड़ी एक और मीडिया रिपोर्ट मिली। 18 नवंबर 2017 को हिंदुस्तान टाइम्स की छपी इस रिपोर्ट में बताया गया था “16 सितंबर को एक महिला ने पुलिस में चोरी की शिकायत दर्ज कराई थी। महिला ने एक नाबालिग पर शक जताया तो पुलिस ने अन्य संदिग्धों के साथ लड़के को भी हिरासत में ले लिया और उससे कबूलनामा लेने के लिए कथित तौर पर उसे प्रताड़ित किया।”  

आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला की न्यूज डेस्क से संपर्क किया। यहां हमें 19 नवंबर 2017 को प्रकाशित खबर मिली। इस खबर में बताया गया, "वीडियो में जिस दारोगा के क्रूरता की तस्वीर दिख रही है उसका नाम केएन शाही है। एसपी आरपी सिंह ने बताया कि मामले को संज्ञान में लेते हुए आरोपी एसआई को निलंबित कर दिया है। बताया गया कि पनियरां थाना क्षेत्र के उस्का गांव की रहने वाली सरीता देवी के घर 15 सितंबर 2017 को चोरी हुई। इस मामले में दो किशोरों के खिलाफ सरीता देवी ने 16 सितंबर को नामजद तहरीर दी। यह दोनों उसी गांव के रहने वाले हैं। दोनों की उम्र करीब 17 वर्ष है।"
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पड़ताल का नतीजा 
हमारी पड़ताल में यह साफ है कि घटना 2017 है जिसे अभी का बताकर शेयर किया जा रहा है। आठ साल पुरानी घटना को हाल ही में भाजपा और योगी सरकार से जोड़कर भ्रामक जानकारी फैलाने की कोशिश की जा रही है।
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