सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें एक ड्रोन उड़ता हुआ नजर आ रहा है। कुछ दूरी पर उड़ने के बाद इस ड्रोन से एक इमारत पर धमाका किया जाता है। जिसके बाद आग की लपटें उठती हुई नजर आती हैं।
क्या है दावा
वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये ड्रोन हिजबुल्ला के हैं जो इस्राइली नियंत्रण वाले उत्तरी फिलिस्तीन में तेल रिफाइनरियों तक पहुंच गए और उन्हें नष्ट कर दिया। कहा जा रहा है कि इस्राइली आईडीएफ इन घातक ड्रोनों को रोकने में विफल रहा।
जुनैद सुहैस (@junaidsuhais) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “हिजबुल्लाह के ड्रोन कब्जे वाले फिलिस्तीन के उत्तरी इलाके में तेल रिफाइनरियों तक पहुंच गए।”
हज कासिम आर्मी (@AsgharA80266658) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “हिजबुल्लाह के ड्रोन कब्जे वाले फिलिस्तीन के उत्तर में तेल रिफाइनरियों तक पहुंच गए, इजरायली आईडीएफ इन घातक ड्रोन को रोकने में विफल रहा।”
पड़ताल
इस वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां से हमें
वॉइस ऑफ इंडिया के यूट्यूब चैनल पर हमें ये वीडियो 22 जुलाई 2024 को प्रकाशित मिला। इस वीडियो के साथ शीर्षक लिखा हुआ था “रूसी अधिकारियों का कहना है कि यूक्रेनी ड्रोन हमले से तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचा है।”
इस खबर के डिस्क्रिप्शन में बताया गया था “रूस के क्रास्नोडार क्षेत्र के अधिकारियों ने बताया कि यूक्रेन के ड्रोन हमले ने रूसी तेल दिग्गज रोसनेफ्ट के स्वामित्व वाली तुआप्से तेल रिफाइनरी को नुकसान पहुंचाया, जिससे आग लग गई जिसे बाद में बुझा दिया गया। इसी प्लांट को इस साल की शुरुआत में कई यूक्रेनी हमलों से नुकसान पहुंचा था।
रूस के रक्षा मंत्रालय ने बताया था कि रूस-यूक्रेन सीमा के साथ और उसके आस-पास के इलाकों में रात भर में 75 यूक्रेनी हवाई ड्रोन नष्ट कर दिए गए, जिनमें क्रास्नोडार के ऊपर आठ ड्रोन शामिल हैं।”
इस खबर पर और ज्यादा जानकारी के लिए हमने इससे जुड़े कुछ कीवर्ड को गूगल पर खोजने की कोशिश की। गूगल पर हमें
रॉयटर्स की एक खबर मिली जिसमें इस वीडियो को शेयर किया गया था। 22 जुलाई 2024 को प्रकाशित इस खबर के अनुसार “रूसी अधिकारियों ने सोमवार को बताया कि काला सागर पर स्थित रूस की सबसे बड़ी तेल रिफाइनरी, रात में यूक्रेनी ड्रोन हमले में क्षतिग्रस्त हो गई, जिससे उसमें आग लग गई।"
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो रूस और यूक्रेन युद्ध से संबंधित है और करीब दो माह पुराना है। इसका हिजबुल्ला से कोई संबंध नहीं है।