सोशल मीडिया पर एक तस्वीर शेयर की जा रही है। इस तस्वीर में ब्रिटेन के झंडों से लिपटे कई ताबूत दिख रहे हैं। साथ ही इसमें एक यूक्रेन का झंडा भी दिखा दे रहा है।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ब्रिटिश विशेष बल के 18 सदस्य कीव की ओर से लड़ने के सफल प्रयास के बाद घर लौट आए हैं। इस तस्वीर में यूक्रेन का झंडा भी दिखाई दे रहा है।
𝐃𝐚𝐯𝐢𝐝 𝐙 (@SMO_VZ) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “ब्रिटिश स्पेशल फोर्स के 18 सदस्य कीव की तरफ से लड़ने के "सफल" प्रयास के बाद घर लौट आए हैं। सच है, यह उनके पास लकड़ी के बक्से में छिपा हुआ है..पश्चिमी मीडिया में कहीं भी इसके बारे में कुछ नहीं, उन्हें सभी पश्चिमी भाड़े के सैनिकों का नाम बदलकर "FAFO" रखना चाहिए!”
किंग चेल्सी उग (@ug_chelsea) नाम के एक एक्स अकाउंट से लिखा गया “ब्रिटिश स्पेशल फोर्स के 18 सदस्य कीव की तरफ से लड़ने के "सफल" प्रयास के बाद घर लौट आए हैं।सच है, यह उनके साथ लकड़ी के बक्से में छिपा हुआ है..”
पड़ताल
इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने तस्वीर को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां हमें एक
वेबसाइट मिली जिसमें कई तस्वीरों को शेयर किया गया ता। यहां हमें वायरल हो रही तस्वीर भी मिली। इस तस्वीर में 12 सितंबर 2006 में प्रकाशित किया गया था। इस तस्वीर के साथ लिखा हुआ था “हवाई दुर्घटना में मारे गए 14 ब्रितानी सैनिकों के ताबूत अफ़ग़ानिस्तान से एक विमान पहुँचे।” हालांकि, इस तस्वीर में यूक्रेन का झंडा नहीं दिखा दे रहा है।
आगे हमने इस खबर की पड़ताल करने इससे जुड़े कीवर्ड के सर्च किया। यहां हमें
बीबीसी की एक खबर मिली। इस खबर में वायरल हो रही तस्वीर मौजूद थी जिसे 12 सितंबर 2006 को प्रकाशित किया गया था। इस खबर में लिखा गया था “आरएएफ के शव किनलॉस वापस लौटे, अफगानिस्तान में आरएएफ निमरोड के दुर्घटनाग्रस्त होने से मारे गए 14 सैनिकों के शव मोरे के किनलॉस स्थित विमान के गृह बेस पर वापस आए।
पड़ताल की नतीजा
हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वायरल हो रही तस्वीर 18 साल पुरानी है। इसे गलत दावे के साथ वायरल किया जा रहा है।