सोशल मीडिया एक वीडियो तेजी से वायरल हो रहा हैं जिसमें बहुत से लोग दिख रहे है इनमें से कुछ औरतें रोती हुई नजर आ रही हैं। ये वीडियो असम का बताया जा रहा है। वीडियो में कुछ लोगों को बसों में भरकर कहीं ले जाया जा रहा है। बस में कुछ पुलिस अधिकारी भी नजर आ रहे हैं।
क्या है दावा
इस वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि असम से मुस्लमानों को डिटेंशन कैंप में भेजा जा रहा है। वीडियो को असम के बारपेटा जिले का बताया जा रहा है जिसमें 28 मुसलमानों को जबरन डिटेंशन कैंप भेजा जा रहा है।
ध्रुव राठी (पैरोडी) (@dhruvrahtee) नाम के एक एक्स अकाउंट नें वीडियो को शेयर करते हुए लिखा “असम के बारपेटा जिले में 28 मुसलमानों को डिटेंशन कैंप में भेजा गया है, जिनमें 9 महिलाएं और 19 पुरुष शामिल हैं। यह सब भाजपा सरकार के राज में हो रहा है।”
पूजा माथुर (@PoojaMathur01) नाम की एक एक्स यूजर ने लिखा “अगर आप इंसान हैं और इंसानियत में हैं तो इन चिल्लाओ मेहसूस को, अपने दर्द को मेहसूस करो...! असम के बारपेटा ज़िले से 28 लोगों को डिटेंशन कैंप भेजा गया, इनमें 9 महिलाएं और 19 पुरुष हैं। पल में अपनों को पराया कर दिया।”
ध्रुव राठी व्यंग्य @DhruvRatheFc नाम के एक यूजर ने लिखा “असम के बरपेटा में 28 बंगाली मुस्लिमों को विदेशी घोषित कर 50KM दूर गोवालपारा जिले के डिटेंशन सेंटर भेज दिया है! उनके परिजन बिछड़ने पर रो रहे बिलख रहे है। डिटेंशन सेंटर में भेजे गये लोगों में 18 पुरुष 9 महिलाएं है, असम में 1,19,570 D वोटर है जिनमें से 54,411 को विदेशी घोषित कर दिया गया है।”
पड़ताल
हमने इस दावे की पड़ताल करने के लिए सबसे पहले ‘असम’, ‘डिटेंशन सेंटर’, ‘28 मुस्लिम’ जैसे कुछ कीवर्ड सर्च किए जिसके बाद हमें कुछ खबरें देखने को मिली। इन खबरों के मुताबिक जिन लोगों को डिटेंशन सेंटर भेजा गाया है उन्हें विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित किया गया था।
इस खबर के बारे में और अधिक जानकारी हमें न्यूज एजेंसी एएनआई पर मिली।
एएनआई के मुताबिक असम के बारपेटा जिले की पुलिस ने 28 विदेशियों को गोलपाड़ा जिले के मटिया स्थित ट्रांजिट कैंप में स्थानांतरित कर दिया। इन व्यक्तियों को पहले विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा अवैध घोषित किया गया था।
पड़ताल का नतीजा
हमारी पड़ताल में मुस्लिमों को जबरन डिटेंशन कैंप भेजने वाला दावा फर्जी साबित हुआ। उन्हें विदेशी न्यायाधिकरण द्वारा विदेशी घोषित किया गया था।