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Fact Check: एक साथ नमाज पढ़ने और रामलीला के मंचन का वीडियो झूठे दावे को साथ किया जा रहा शेयर

Sat, 04 Oct 2025 07:10 PM IST
अस्मिता त्रिपाठी फैक्ट चेक डेस्क , अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि एक तरफ कुछ लोग जानबूझकर उकसाने के लिए रामलीला के दौरान नमाज अदा कर रहे हैं। हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है।
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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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सोशल मीडिया पर इन दिनों एक वीडियो वायरल हो रहा है। वीडियो में एक तरफ कुछ लोग नमाज अदा करते नजर आ रहे हैं। वहीं, दूसरी ओर कुछ लोग रामलीला का मंचन कर रहे हैं। वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों ने जानकर उकसाने के लिए सड़क पर नमाज पढ़ी है। 

अमर उजाला ने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। हमने पाया कि वाराणसी के पुरानी लाटभैरव की रामलीला में बीते 500 साल से एक साथ ही नमाज अदा की जाती है और रामलीला का मंचन भी होता है। 

क्या है दावा

सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर कर दावा किया जा रहा है कि कुछ लोगों ने जानकर के उकसाने के लिए रामलीला मंचन के दौरान नमाज अदा की है। 

पैसा वाला (@AmirLadka) नाम के एक्स यूजर ने लिखा “रामलीला चल रही थी। लेकिन जिहादियों ने जान बूझकर उकसाने के हिसाब से सड़क पर नमाज़ पढ़ना तय किया ताकि लोग भड़कें और दंगे हों।” पोस्ट का लिंक आप यहां और आर्काइव लिंक यहां देख सकते हैं।

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इसी तरह के कई अन्य दावों के लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं। इनके आर्काइव लिंक आप यहां और यहां देख सकते हैं।

पड़ताल 

इस दावे की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। इस दौरान हमें एबीपी न्यूज की रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 26 सितंबर 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में बताया गया है कि काशी के लाटभैरव स्थित मैदान में एक साथ रामचरितमानस की चौपाई पर रामलीला का आयोजन और अजान की गूंज के साथ नमाज पढ़ी गई।  यह तस्वीर हर वर्ष देखने को मिलती है और काशी की गंगा जमुनी तहजीब को दर्शाती है। लोगों के बीच भी इस बात की चर्चा रही कि जहां एक तरफ बाल स्वरूप रामलीला के पात्र रामचरितमानस की चौपाई पर मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम के जीवन लीलाओं का वर्णन कर रहे थे। वहीं दूसरी तरफ इसी चबूतरे पर शांतिपूर्ण तरीके से नमाज भी अदा की जा रही थी।

 

आगे की पड़ताल के लिए हमने अमर उजाला के न्यूज डेस्क से संपर्क किया। इस दौरान हमें एक रिपोर्ट मिली। यह रिपोर्ट 26 सितंबर 2025 को प्रकाशित की गई है। रिपोर्ट में लिखा है “बेहद हसीन वो शाम हो जाए जब हर हिंदू में हो खुदा और मुस्लिम में राम नाम हो जाए...। 500 साल पुरानी लाटभैरव की रामलीला में कुछ ऐसा ही नजारा जीवंत हो उठा। एक तरफ अजान में अल्लाह हू अकबर... तो दूसरी ओर ढोलक की थाप और मंजीरे की खनक पर मंगल भवन अमंगल हारी... गूंज रहा था”।

पड़ताल का नतीजा 

हमने अपनी पड़ताल में वायरल दावे को गलत पाया है। वाराणसी में 500 साल से एक साथ ही रामलीला और नमाज अदा किया जाता है। वायरल वीडियो को शेयर कर लोगों में भ्रम फैलाने की कोशिश की जा रही है। 

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