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Fact Check: कोल्हापुर में ट्रक में मिले 63 बच्चों के रोहिंग्या होने का दावा फर्जी, पढ़ें पड़ताल

Thu, 10 Oct 2024 07:47 PM IST
संध्या फैक्ट चेक डेस्क, अमर उजाला

सार

Fact Check: सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है जिसमें एक ट्रक से बच्चों को उतारा जा रहा है। दावा किया जा रहा है कि रोहिंग्या मुसलमान है जिसे कोल्हापुर में ट्रक से लाया गया है। 

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फैक्ट चेक - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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एक ट्रक से बच्चों को उतारने का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। वीडियो में देखा जा सकता है पुलिस की मौजूदगी में कुछ बच्चों को ट्रक से उतारा जा रहा है। 
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क्या है दावा 

वीडियो को शेयर करके दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो महाराष्ट्र के कोल्हापुर का है। दावा किया जा रहा है कि इस ट्रक में रोहिंग्या मुसलमानों को भरकर लाया गया है। ममता बनर्जी पर भी इस दावे के साथ निशाना साधा गया। 

कुलविंदर सिंह टैम्बर (@thelion889) नाम के एक एक्स यूजर ने लिखा “ये सब आप की मौत के सौदागर , आपकी हत्या करने के लिए आ रहे हैं, सतर्क रहें आज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रोहिंग्या मुसलमानों को ले जा रहा एक ट्रक पकड़ा गया। ये वहां जाकर आधार कार्ड, राशन कार्ड बनवा लेते ममता बनर्जी उन्हें बांग्लादेश से लाकर पूरे देश में भर रही हैं।”
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राव प्रवीणसिंह (@pravinsingh_rao) नाम के एक अकाउंट से वीडियो को शेयर करके लिखा गया “आज महाराष्ट्र के कोल्हापुर में रोहिंग्या मुसलमानों को ले जा रहा एक खचाखच भरा ट्रक पकड़ा गया। ममता बनर्जी उन्हें बांग्लादेश से लाकर पूरे देश में भर रही हैं। हम हिंदू कब जागेंगे? देश बहुत बड़े खतरे में है। सावधान हिंदू बंधु सावधान रहें।” 
 

पड़ताल 

वीडियो की पड़ताल करने के लिए हमने सबसे पहले वीडियो के कीफ्रेम्स को गूगल रिवर्स इमेज पर सर्च किया। यहां से हमें वीडियो से जुड़ी हुई कुछ खबरें मिली। यहां से हमें में इंडिया टीवी की वेबसाइट पर 18 मई 2023 वायरल वीडियो से संबंधित खबर मिली। यहां से ये पता चला कि वीडियो पुराना है। 

जांच में आगे बढ़ने पर हमें टीवी9 की भी एक रिपोर्ट मिली। इस रिपोर्ट में बताया गया था कि 17 मई 2023 को कोल्हापुर में ट्रक में 63 बच्चे मिले थे। मामला सामने आने के बाद पुलिस को जानकारी दी गई। पुलिस से पता चला कि बच्चे पश्चिम बंगाल और बिहार के रहने वाले थे और कोल्हापुर के एक मदरसे में पढ़ते थे। गर्मी में छुट्टियों में सभी घर गए थे और छुट्टियां खत्म होने के बाद बच्चे एक साथ ट्रेन से कोल्हापुर पहुंचे थे। 

पड़ताल का नतीजा

हमारी पड़ताल में ये साफ है कि वीडियो के जरिए गलत दावा किया जा रहा है। यह घटना कम से कम डेढ़ साल पुरानी है। 
 
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