इस लिहाज से लखनऊ का यह केंद्र रक्षा क्षेत्र में देश की स्वदेशी क्षमताओं को तेजी से बढ़ाने वाला जरिया बना है। मौजूदा समय में ब्रह्मोस मिसाइल के उत्पादन में लगभग 83% स्वदेशी सामग्री का उपयोग किया जा रहा है, और 2026 तक इसे 85% तक पहुंचाने का लक्ष्य है। यहां छोटे उद्योगों और एमएसएमई की मदद से टाइटेनियम कास्टिंग, एयरफ्रेम और एवियोनिक्स जैसे उपकरण देश में ही बनाए जा रहे हैं, जिससे विदेशी आपूर्ति श्रृंखलाओं पर निर्भरता खत्म हो रही है।
अगली पीढ़ी की तकनीक भी इसी केंद्र में हो रही तैयार
लखनऊ का यह केंद्र केवल मौजूदा जरूरतों को पूरा नहीं कर रहा, बल्कि यह भविष्य की 'ब्रह्मोस नेक्स्ट जनरेशन' (ब्रह्मोस एनजी) मिसाइल के उत्पादन का भी केंद्र बनेगा। यह नया संस्करण हल्का और ज्यादा कॉम्पैक्ट होगा, जिसे विमानों, जहाजों और जमीनी प्लेटफार्म्स से आसानी से लॉन्च किया जा सकेगा। यह भारत की भविष्य की सुरक्षा रणनीति को अभेद्य बनाएगा।