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Samajwadi Party: क्यों चर्चा में हैं गगन यादव, अखिलेश और समाजवादी पार्टी पर लगाए कौन से आरोप?

Thu, 05 Feb 2026 04:16 PM IST
संध्या भावेष पांडेय

सार

गगन यादव के  सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर किए जा रहे दावों की वजह से बवाल हो रहा है। गगन को समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव का करीबी बताया जाता है। पूरा मामला क्या है समझते हैं... 
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सपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव। - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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भारतीय राजनीति में जब भी 'समाजवाद' शब्द का जिक्र होता है, तो डॉ. राम मनोहर लोहिया की याद आती है। लोहिया का समाजवाद वह था जहां योग्यता सर्वोपरि थी और वंशवाद के लिए कोई स्थान नहीं था। उत्तर प्रदेश की राजनीति में खुद को लोहिया का उत्तराधिकारी बताने वाली समाजवादी पार्टी (सपा) पर इसके उलट चलने का आरोप लगते रहे हैं। ताजा मामला खुद को अखिलेश और सपा का करीब बताने वाले युवा गगन यादव से जुड़ा है। गगन के आरोपों के बाद एक बार फिर कहा जा रहा है कि  पार्टी में ऊंचे पदों के लिए 'यादव' होना काफी नहीं है, बल्कि 'मुलायम परिवार' का हिस्सा होना अनिवार्य है।
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गगन यादव के दावे क्या हैं?
गगन यादव ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर दावा किया कि उनकी हाल ही में अखिलेश यादव से मुलाकात हुई जिसमें उन्हें काफी अपमान सहना पड़ा। अखिलेश ने उन्हें भाजपा और आरएसएस का एजेंट बताया। समाजवादी पार्टी और अखिलेश यादव के करीबी रहे गगन यादव की यह सोशल मीडिया पोस्ट वायरल हो गई है और लोगों के बीच चर्चा का विषय है। गगन के आरोपों के बाद एक बार फिर कहा जा रहा है कि  पार्टी में ऊंचे पदों के लिए 'यादव' होना काफी नहीं है, बल्कि 'मुलायम परिवार' का हिस्सा होना अनिवार्य है।

मुलायम का कुनबा और परिवार की 'सुप्रिमेसी'
पार्टी का इतिहास देखेंगे तो इस तरह के कई उदाहरण भी दिखते हैं। मुलायम सिंह यादव ने जब इस पार्टी की नींव रखी थी, तब उद्देश्य पिछड़ों और शोषितों की आवाज बनना था। लेकिन धीरे-धीरे पार्टी के शीर्ष पदों से लेकर जिला पंचायतों तक केवल यादव परिवार का कब्जा होता चला गया। धर्मेंद्र यादव, अक्षय यादव, आदित्य यादव जैसे नाम इस बात की पुष्टि करते हैं।
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अखिलेश बनाम शिवपाल: वर्चस्व की लड़ाई 
2016-17 का दौर समाजवादी पार्टी के इतिहास का सबसे निर्णायक मोड़ था, जब चाचा शिवपाल यादव और भतीजे अखिलेश यादव के बीच सत्ता का खुला संघर्ष हुआ। शिवपाल यादव, जिन्होंने मुलायम सिंह के साथ मिलकर खून-पसीने से पार्टी को खड़ा किया था, उन्हें अखिलेश के सामने झुकना पड़ा। अंततः अखिलेश यादव ने न केवल पार्टी पर कब्जा किया, बल्कि यह भी संदेश दिया कि सपा का मतलब अब सिर्फ अखिलेश यादव है। 
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(नोट: यह लेखक (भावेष पांडेय) के निजी विचार हैं। लेखक अधिवक्ता और सामाजिक कार्यकर्ता हैं। विभिन्न पत्रिकाओं में लेखन करते हैं)
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