‘जब भी कोई व्यक्ति सत्ता की ओर ललचाई नजरों से देखता है, उसके चरित्र में गिरावट शुरू हो जाती है।’
यह चर्चित कथन अमेरिका के तीसरे राष्ट्रपति थॉमस जैफरसन का है। इस कथन के माध्यम से जैफरसन ने राजनीति में जनसेवा की भावना को महत्वपूर्ण बताते हुए, सत्ता के प्रति अत्यधिक लोलुपता के गंभीर परिणामों की तरफ इशारा किया था। जैफरसन का ये कथन वर्तमान में उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बिल्कुल सटीक तरीके से लागू होता है।
देश में सबसे ज्यादा लोकसभा सीटों वाले प्रदेश में राजनीति इस वक्त नई करवट ले रही है। परंपरागत रूप से MY ‘मुस्लिम+यादव’ समीकरण पर आधारित समाजवादी पार्टी की राजनीति में एक नया मोड़ आता दिख रहा है। यह मोड़ बेहद दिलचस्प है।
जिन मुद्दों से थी दूरी उन पर अभियान चला रहे
सपा सुप्रीमो अखिलेश यादव लगातार उन मुद्दों पर भाजपा को घेरने की कोशिश कर रहे हैं, जिन्हें पहले वो राजनीति के लिए ‘अनफिट’ पाते थे। अखिलेश स्वामी अविमुक्तेश्वरानंद के मुद्दे पर वह लगातार भाजपा सरकार को घेर रहे हैं। जबकि जब अखिलेश खुद मुख्यमंत्री थे तब भी अविमुक्तेश्वरानंद पर लाठियां बरसाई गई थीं। हालांकि, बाद में मांगी गई माफी की चर्चा कम हुई। अब हो रही है।
क्यों पड़ी सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड की जरूरत
अखिलेश यादव लगातार दो विधानसभा चुनाव में बुरी तरह चुनावी हार झेल चुके हैं। 2027 का चुनाव उनके और उनकी पार्टी के लिए अस्तित्व का सवाल है। दोनों ही चुनाव में उन्हें उनके परंपरागत वोटबैंक ने वोट किया लेकिन चुनावी हार नहीं टाली जा सकी। शायद अखिलेश को लगने लगा है कि उन्हें विधानसभा चुनाव में सॉफ्ट हिंदुत्व की जरूरत पड़ेगी। अविमुक्तेश्वरानंद मामले पर उनका सपोर्ट इसी सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड का नतीजा है।
सपा के नए रुख पर भरोसा करेगी पब्लिक?
कह सकते हैं कि हाल-फिलहाल में सपा के बदलते स्टैंड के पीछे कई कारण हैं। पार्टी को अब यह लगने लगा है कि केवल एक वोटबैंक के जरिए चुनावी जीत संभव नहीं है। इसीलिए सॉफ्ट हिंदुत्व कार्ड, ब्राह्मण समर्थक कार्ड चलाए जा रहे हैं। वृहद स्तर पर एक चुनावी वोटबैंक बनाने की तैयारी है, जिसके जरिए 2027 की जीत सुनिश्चित की जा सके। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि सपा की इस कवायद पर राज्य की जनता भरोसा करती है या नहीं।
(ये लेखक के निजी विचार हैं, लेखक इलाहाबाद विश्वविद्यालय में असिस्टेंट प्रोफेसर हैं। अखबारों और पत्र-पत्रिकाओं में राजनीतिक-सामाजिक मुद्दों पर लेखन करते हैं।)