राजस्थान के नगर निकाय चुनाव में भारतीय जनता पार्टी ने शानदार प्रदर्शन किया है। नगर निगम, नगर परिषद और नगरपालिकाओं में कमल खिला। पार्टी का कहना है कि मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की अगुवाई में मिशन मोड पर यह चुनाव लड़ा गया। टिकट वितरण से चुनाव प्रचार तक उन्होंने खुद मोर्चा संभाला। बड़े नेताओं को संभागवार जिम्मेदारी दी और प्रतिदिन फीडबैक लिया। भजनलाल ने 10 नगर निगमों में रोड शो किए। निकाय चुनाव के परिणामों के बाद सभी पार्षदों को एकजुट रखा और निर्दलीयों को भी साधा।
इस चुनाव में भाजपा भरतपुर और डीग जिले की 90 प्रतिशत नगरपालिकाओं में अपना बोर्ड बनाने में सफल रही है। भरतपुर नगर निगम में भी निर्विरोध कमल खिला है। जयपुर में लगातार सातवीं बार नगर निगम में भाजपा का बोर्ड बन रहा है। राजस्थान में इस बार एक साथ सभी 10 नगर निगम, 47 नगर परिषद सहित 252 नगर पालिकाओं में चुनाव एक साथ हुए हैं। इन निकायों में दमदार जीत को सरकार के ढाई साल के काम पर जनता की मोहर बता रही है।
निर्विरोध निर्वाचन में बड़ा इजाफा
कांग्रेस के दौर (2018-23) में 11 निकाय में निर्विरोध निर्वाचन हुआ था। इनमें से तीन भाजपा, छह कांग्रेस और दो निर्दलीयों के खाते में गया था। इस बार 33 निकायों में निर्विरोध निर्वाचन हुआ है। इनमें 30 भाजपा, दो कांग्रेस और एक भाजपा समर्थित उम्मीदवार के पक्ष में गया है। कांग्रेस ने इस चुनाव में जातिगत समीकरण साधने की कोशिश की। कांग्रेस की इस कोशिश पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा की सोशल इंजीनियरिंग भारी रही।