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Sangram Singh: ‘सलमान खान ने मेरे स्ट्रगल का जिक्र किया वो टर्निंग प्वाइंट था’, एक्टिंग जर्नी पर बोले संग्राम

सार

Sangram Singh Interview: रेसलर संग्राम सिंह ने टीवी और फिल्मों की दुनिया में भी अपने लिए अलग पहचान बना ली है। वह 'बिग बॉस' और 'सर्वाइवर इंडिया' जैसे रियलिटी शोज का हिस्सा बनकर भी लाइमलाइट में आए। अमर उजाला डिजिटल से संग्राम सिंह ने अपने फिल्मी करियर को लेकर बातचीत की। पढ़िए बातचीत के प्रमुख अंश:
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संग्राम सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@sangramsingh_wrestler
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विस्तार
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हाल ही में रेसलर संग्राम सिंह ने अमर उजाला डिजिटल से अपनी पर्सनल, प्रोफेशनल जिंदगी को लेकर लंबी बातचीत की। आखिर रेसलिंग से उनका फिल्मी और टीवी की दुनिया की तरफ कैसे आना हुआ? वह रेसलिंग से जुड़ी एक फिल्म का हिस्सा बने थे, उसका आखिर क्या हुआ? अपने करियर से जुड़ी और भी कई बातें संग्राम सिंह ने साझा की हैं। 

जब सलमान खान ने मेरा नाम लिया, वो मोमेंट टर्निंग प्वाइंट था

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संग्राम सिंह टीवी की दुनिया में शामिल होने के अपने शुरुआती दिनों के बारे में बताते हैं। वह कहते हैं, ‘मैं रेसलिंग से होते हुए टीवी और फिल्मों की दुनिया में आया। शुरुआत में लोग मुझे सिर्फ मजाक उड़ाने वाला लड़का मानते थे। लेकिन धीरे-धीरे जब मेरा काम दिखने लगा तो वही लोग सराहने लगे। मैं उस वक्त साउथ अफ्रीका से प्रो रेसलिंग की ट्रेनिंग लेकर लौटा। कुछ वक्त के बाद ‘बिग बॉस’ रियलिटी शो में पहुंचा, जहां देश के नामी लोग थे। उस मंच पर सलमान खान ने मेरे स्ट्रगल का जिक्र किया, वो मोमेंट मेरे लिए एक टर्निंग प्वाइंट था।’ 

मैं भेदभाव नहीं करता, मैं सिर्फ सच्चाई के साथ खड़ा होता हूं
संग्राम सिंह ने कुछ वक्त में ही अपने लिए टीवी की दुनिया में पहचान बना ली थी, इसकी वजह उनकी सच्चाई थी। वह कहते हैं, ‘सर्वाइवर शो में जब लोगों से पूछा गया कि लीडर कौन हो सकता है? तो सबने मेरा नाम लिया। मैं कभी भेदभाव नहीं करता हूं। हमेशा सच्चाई के साथ खड़ा रहता हूं। उसी शो में पायल से मुलाकात हुई, जिसने मेरे स्ट्रगल के पीछे की सच्चाई को पहचाना।’ 

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संग्राम सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@ sangramsingh_wrestler

फिल्म नहीं बनी लेकिन मेरा भरोसा बना रहा
संग्राम सिंह ने रियलिटी शो के बाद एक फिल्म पर काम करना शुरू किया, जो बन नहीं सकी। इस अनुभव पर वह कहते हैं, ‘मेरी जिंदगी में श्याम बाबू एक मिरकल की तरह आए। कोई जान-पहचान वाला था, जिसने कहा कि एक फिल्म बन रही है। इंडिया के पहले रेसलर पर और तुम्हें बात करनी चाहिए। मुझे उस वक्त तक कुछ भी अंदाजा नहीं था, न सिनेमा के मायने, न कैमरे के सामने खड़े होने की समझ। मैं उस फिल्म के लिए इंडिया का पहला ब्रांड एंबेसडर और स्पीकर बना। फैमिली वेलफेयर से लेकर एंटरटेनमेंट तक की बात उस एक मीटिंग में हुई। लेकिन श्याम बाबू ने मुझसे एक वादा लिया कि मैं अगले कुछ साल सिर्फ इस प्रोजेक्ट पर फोकस करूंगा और कोई दूसरा काम नहीं करूंगा। मैंने हां कर दिया और वहीं से एक नई शुरुआत हुई।

तीन साल की मेहनत, सेविंग्स, उम्मीद...सब खत्म हो गया
संग्राम सिंह आगे बताते हैं, ‘नितिन देसाई जी प्रोजेक्ट से जुड़ गए, एक बड़ी टीम तैयार होने लगी, फिल्म अनाउंस हो गई, नाम आने लगे, न्यूज में मेरी चर्चा होने लगी। लेकिन फिर किसी कारण से वो फिल्म रुक गई। कोई और होता तो टूट जाता, लेकिन मेरे पास टूटने का विकल्प कभी था ही नहीं। तीन साल तक कोई कमाई नहीं हुई। मैं हर रोज अपनी सेविंग्स से ही जिंदगी चला रहा था और खाली समय में मराठी, अभिनय और टेक्निकल चीजें सीखनी शुरू कर दीं। मुझे यह तक नहीं पता था कि कैमरे की लाइट कैसी होती है या डायलॉग कैसे बोलते हैं। लेकिन मैं सीखने में लगा, क्योंकि मुझे खुद पर भरोसा था। तीन साल की मेहनत, सेविंग्स, उम्मीद...सब खत्म हो गया था। लेकिन मैंने हिम्मत नहीं छोड़ी। फिर श्याम बाबू ने ही समझाया कि सिर्फ एक्टिंग नहीं करनी है, अभिनय समझना है।’  

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संग्राम सिंह - फोटो : इंस्टाग्राम@ sangramsingh_wrestler
अब सिर्फ वो फिल्म करता हूं, जो आत्मा से जुड़ती है
आगे भी संग्राम सिंह को फिल्म ऑफर होती हैं, उन्हें किस आधार पर सेलेक्ट करते हैं? यह पूछने पर वह कहते हैं, ‘जब फिल्म नहीं बनी तो मैंने एक गाना किया। आगे भी प्रोजेक्ट्स आए, फिर रुके, फिर लौटे। एक फिल्म करने वाले थे, सुपरस्टार के साथ कुश्ती का सीन था। मैंने मना कर दिया क्योंकि अब मैं समझ चुका था कि सिनेमा सिर्फ शोहरत नहीं है, जिम्मेदारी है। कुछ लोग तो आए जिन्होंने 30-50 लाख देने की बात कही। लेकिन मैं सोचता था, अगर कहानी में जान नहीं है, तो पैसा किस काम का? मैं वो फिल्में करना चाहता था जो जिंदगी बदलें, कम से कम किसी एक की।‘ अब जब लोग स्क्रिप्ट लाते हैं, तो मैं सबसे पहले ये सोचता हूं कि क्या मैं इस कहानी में अपना सच देखता हूं? क्या ये मेरी आत्मा से मेल खाती है? अगर हां, तो मैं सब कुछ छोड़कर वो करता हूं। वरना मैं गर्मियों में उन लोगों को पानी पिलाता हूं, सर्दियों में रस और चुपचाप अलविदा कह देता हूं।’  

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