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वेब सीरीज पर नजर रखने की सरकार की पहल पर हंगामा, ओटीटी सेवा प्रदाता दो धड़ों में बंटे

Tue, 03 Mar 2020 06:35 PM IST
anand anand अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई

सार

  • ओटीटी (ओवर द टॉप) वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं में वयस्क सामग्री की तेजी से होती भरमार ने केंद्र सरकार को भी सतर्क कर दिया है
  • सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस बाबत ओटीटी प्लेटफॉर्म के मालिकों से बातचीत के दौरान एक सहायक निकाय गठित कर आचार संहिता को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं
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web series - फोटो : file photo
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विस्तार
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ओटीटी (ओवर द टॉप) वीडियो स्ट्रीमिंग सेवाओं में वयस्क सामग्री की तेजी से होती भरमार ने केंद्र सरकार को भी सतर्क कर दिया है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इन ओटीटी सेवा प्रदाताओं को अपने प्लेटफॉर्मों पर वयस्क मनोरंजन और राजनीतिक रूप से संवेदनशील सामग्री विनियमित करने के लिए सौ दिन का वक्त दिया है। लेकिन, सरकार की इस पहल को लेकर ओटीटी सेवा प्रदाता दो धड़ों में बंट गए हैं।

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ओटीटी सेवा में कार्यक्रम निर्माता कंपनी अपनी सामग्री बिना किसी वितरक या प्रदर्शक को बीच में लाए सीधे दर्शक तक मोबाइल ऐप के जरिए पहुंचा देती है। इसे ही ओवर द टॉप यानी ओटीटी सेवा कहा जाता है। सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इस बाबत ओटीटी प्लेटफॉर्म के मालिकों से बातचीत के दौरान एक सहायक निकाय गठित कर आचार संहिता को अंतिम रूप देने के निर्देश दिए हैं।

इस बैठक में में नेटफ्लिक्स, अमेजन प्राइम, जी5, एमएक्स प्लेयर, ऑल्ट बालाजी, हॉटस्टार, वूट, जिओ, सोनीलिव और अरे शामिल हुए वहीं चार ओटीटी प्लेटफार्मों ने पिछले महीने गठित हुई सहायक निकाय 'डिजिटल सामग्री शिकायत परिषद' का हिस्सा बनने से मना कर दिया। जानकारी के अनुसार अमेजन प्राइम ने शुरुआत में ही इस विचार पर अपनी नाराजगी जता दी थी, जबकि नेटफ्लिक्स, जी5, एमएक्स प्लेयर और ऑल्ट बालाजी ने विचार-विमर्श के लिए और समय मांगा है। अब तक, केवल हॉटस्टार, वूट, जिओ, सोनीलिव और अरे ने 'डिजिटल सामग्री शिकायत परिषद' के साथ हस्ताक्षर किए हैं।
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एमएक्स प्लेयर के सीईओ करण बेदी मानते हैं कि ओटीटी मीडिया प्लेटफॉर्म, कंटेंट की प्रकृति और इसके लिए आवश्यक प्रतिबंधों की प्रकृति का निर्धारण करने के लिए सबसे खुद ही अच्छी स्थिति में हैं। और इसके लिए अलग से कोई परिषद बनाने की जरूरत नहीं है। ओटीटी प्लेटफॉर्म में सेंसरशिप ना होने की वजह से फिल्मकार धड़ल्ले से अपनी फिल्में और वेब सीरीज यहां रिलीज करते हैं। हॉलीवुड से लेकर हिंदी सिनेमा की काफी ऐसी फिल्मों को भी यहां पर जगह मिली है जिसपर आमतौर पर सेंसरशिप की कैंची चल जाती है। टेलीविजन पर आपत्तिजनक सामग्री की शिकायत करने के लिए टेलीविजन संचालकों की एक परिषद काम करती है, ऐसी ही एक परिषद केंद्र सरकार ओटीटी के लिए भी बनाने का विचार रखती है।

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