अमित टंडन के इस शो की खासियत ये है कि इसे आप अपने माता पिता और बच्चों के साथ भी देख सकते हैं। पूरे शो में गजब का हास्य और वह भी बिना किसी गाली का सहारा लिए। महंगाई समझाने के लिए वो बताते हैं कि कैसे नए नए मां-बाप बने अभिभावक डायपर का हिसाब जोड़ते हैं। अमित टंडन अपनी निजी जिंदगी पर आधारित सच्चे और काल्पनिक चुटकुले सुनाते हैं और इन्हें चतुराई से आपस में जोड़ते चलते हैं।
शो के सबसे बेहतरीन पल वे हैं जब अमित सुनाते हैं कि कैसे पीढ़ी बदलते बदलते परिवार का दर्शन ही बदल गया। वह कहते हैं, पहले हम अपने मां-बाप की सुनते थे और इस उम्मीद में थे कि बच्चे बड़े होंगे तो हमारी सुनेंगे लेकिन हमारे बच्चे बड़े हुए तो दर्शन ही बदल गया। अब बताया गया कि बच्चों की सुननी होती है। अमित कहते हैं, हमारी पीढ़ी की तो बैटिंग ही नहीं आई। बॉलिंग ही किए जा रहे हैं, अपना नंबर कब आएगा?
पूरा शो एक बार में बैठकर देखे जा सकने लायक बन पड़ा है। शो की प्रोडक्शन क्वालिटी भी आला दर्जे की है। मुंबई के फेमस स्टूडियो में शूट किए गए इस एपीसोड में ध्वनि और प्रकाश के संयोजन के अलावा सेट निर्माण में भी पारिवारिक पसंद का ही ध्यान रखा गया है। दर्शक हर उम्र के हैं और इन दर्शकों का शो के बीच बीच अमित टंडन का चलते रहने वाला संवाद शो को थकने नहीं देता।