चूंकि यह एक धार्मिक और सांस्कृतिक रूप से संवेदनशील विषय है, तो फिल्म बनाते वक्त आपने क्या रिसर्च की? कोई स्क्रिप्चरल स्टडी या एक्सपर्ट से सलाह?
बिलकुल, मुझे अच्छी तरह पता था कि मैं एक बेहद संवेदनशील विषय पर फिल्म बना रहा हूं। इसलिए हमने कोई भी काम बिना रिसर्च के नहीं किया। सबसे पहले हमने शास्त्रों को गहराई से पढ़ा, उनके नोट्स बनाए और फिर उसी समझ के साथ स्क्रिप्ट तैयार की। बाद में वो स्क्रिप्ट हमने संस्कृत कॉलेज के स्कॉलर्स और धार्मिक जानकारों को दिखाई। उन्होंने हर पहलू ध्यान से देखा और कहा कि इसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है। आपने इसे बड़ी श्रद्धा और सच्चाई से दिखाया है। हमारे लिए ये बहुत बड़ी तसल्ली थी। हमने रिसर्च को एक बार का काम नहीं, बल्कि पूरी फिल्म के दौरान चलने वाली प्रक्रिया माना ताकि फिल्म सिर्फ दिखने में नहीं, दिल से भी सच्ची लगे।
अक्षय कुमार और विष्णु मांचू
- फोटो : एक्स@iVishnuManchu
अक्षय कुमार के शिव लुक पर ट्रेलर के बाद कुछ नाराजगी सामने आई। आप इसे कहते लेते है?
सच कहूं तो मैंने खुद वो कमेंट्स नहीं पढ़े। लेकिन हां, सुना जरूर है कि अक्षय सर के शिव लुक को लेकर कुछ लोगों ने ट्रोल किया। भगवान शिव खुद कई रूपों में आते हैं। कभी शांत, कभी गुस्से वाले, कभी मूर्ति के रूप में, तो कभी बिना किसी रूप के। हर किसी को हर रूप पसंद आए, ये जरूरी नहीं होता। अक्षय सर को मैंने बहुत सोच-समझकर चुना है। उनमें वो संतुलन और गरिमा है जो इस किरदार के लिए जरूरी थी। मुझे पूरा यकीन है कि जब लोग पूरी फिल्म देखेंगे, तो उन्हें सिर्फ एक एक्टर नहीं बल्कि भगवान शिव का एहसास होगा।
'कन्नप्पा' की रिलीज में काफी देरी हुई, इसकी सबसे बड़ी वजह क्या रही?
अगर एक चीज की तरफ साफ-साफ इशारा करूं तो वो है वीएफएक्स। शुरुआत में हमें लगा था कि ये हिस्सा सबसे आसान होगा, लेकिन वही सबसे जटिल और थकाने वाला बन गया। हमने जिस सुपरवाइजर को लिया, वो पूरी तरह इस स्केल को समझ ही नहीं पाया। उसका काम आधा-अधूरा था और हमें कई बार चीजें दोबारा करनी पड़ीं। बाद में इंटरनेशनल कंपनियों को लाना पड़ा, पूरा प्रोसेस बदलना पड़ा। लेकिन तब तक बहुत वक्त निकल गया। सच कहूं, तो अगर वीएफएक्स की शुरुआत से सही टीम होती, तो ‘कन्नप्पा’ 6-7 महीने पहले ही थिएटर्स में होती।