तान्या मित्तल, लखन रावत और नीतू बिष्ट (बाएं से दाएं)
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संवाद में पहला सवाल लखन से पूछा गया कि आप क्रिकेटर हैं। आपने रणजी खेला है। फिर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर? कैसे हुआ ऐसा?
इस पर लखन ने कहा, 'मेरी कंटेंट क्रिएशन की जर्नी क्रिकेट से ही शुरू हुई। हम लोगों के जब मैच होते हैं तो उसके बाद हम लोगों को वीडियो दी जाती हैं, बैटिंग की बॉलिंग की। मैं उन्हें सोशल मीडिया पर भी अपलोड कर देता था। वहां पर कुछ प्लेटफॉर्म आए जिन्होंने कहा कि आपके वीडियो बहुत क्लिक करते हैं। आप हमारे प्लेटफॉर्म पर वीडियोज डालो। मुझे लगता है कि क्रिकेट की वजह से ही यह सब हो पाया है'।
नीतू आज के वक्त में सोशल मीडिया पर तरह-तरह के कंटेंट बन रहे हैं। रियल कंटेंट क्या है?
इस पर नीतू ने कहा, 'मैं कहूंगी कि सब अपने तरीके का कंटेंट बनाते हैं तो उनके लिए वही रियल है। हम जो बनाते हैं वो हमारे लिए रियल है। लोग जो बनाते हैं वो उनके लिए रियल है। लेकिन, मुझे लगता है कि व्लॉग्स रियल कंटेंट है, जिसमें आप हर दिन की दिनचर्या दिखाते हैं'।
तान्या आपने अपने वीडियो से लोगों को प्रभावित किया है। आप इतनी मुखर कैसे हैं? आप विवादों में भी रही हैं, फिर भी कोई रिएक्शन क्यों नहीं आता?
इस पर तान्या ने कहा, 'देवभूमि में आकर मैं बहुत उत्साहित हूं सबसे पहले तो। मुझे ऐसा लगता है कि मेरे साथ जो कंट्रोवर्सी जो होती हैं, वह बहुत छोटी है उस लक्ष्य के सामने, जो मैंने देखा है। आज अध्यात्म कंटेंट बनाा और मंदिरों को प्रमोट करना कोई ऐसी चीज नहीं है, जिससे आप पैसे कमा सकते हो। आपको अगर किसी मंदिर का आपको वीडियो बनाना है तो आपको कोई पैसा नहीं मिलता। इसलिए, इस जोनर को कोई चुनता नहीं। मेरा यह मकसद था कि मैं कुछ ऐसा करूं कि मेरी आने वाली पीढ़ी यह न सोचें कि हम कैमरे के सामने कुछ भी करेंगे। मैं चाहती थी कि मुझे जो लोग फॉलो करते हैं वह हमारी संस्कृति, भारतीय विरासत या हमारी धरोहर को आगे लेकर जाएं। कुंभ में जो भी मेरे साथ कंट्रोवर्सी हुई, तो मुझे यही लगता है कि डर की बात से ईमान की बात नहीं करोगे? मुझे अब कोई डर नहीं लगता'।
हाथों से कार्ड बनाकर शुरू किया सफर
तान्या ने आगे कहा, 'मुझे डर नहीं लगता। मैं बहुत छोटी थी जब मैंने अपना सफर शुरू किया। मेरे पास सिर्फ पांच सौ रूपये थे। मैं 12वीं पास थी। एक 12वीं पास लड़की के लिए अपनी खुद की फैक्टरी लगाना। खुद का बिजनेस अकेले सबकुछ घर बैठकर करना, क्योंकि हमें शाम को छह बजे के बाद घर से निकलने की इजाजत नहीं थी। मैं हाथों से कार्ड बना-बनाकर यहां तक पहुंची हूं। जिसके पास कुछ नहीं होता है तो उसे खोने का भी कुछ डर नहीं होता। मैंने एक-एक ईंट जोड़कर पिछले आठ सालों में खुद को बनाया। बिना कोई छुट्टी लिए'।
500 रुपये से इतना बड़ा फैन बेस खड़ा करना और इतनी सफलता। कैसे संभव हुआ?
तान्या ने कहा, 'मैंने आज करीब 200 से ज्यादा लड़कियों को गोद लिया है। नौ शेल्टर होम चला रही हूं। यहां करीब 150 स्ट्रीट डॉग गोद लिए हैं। इसके अलावा अपनी फैक्टरियों के जरिए हम ढाई सौ से ज्यादा महिलाओं को प्रशिक्षित कर रहे हैं। चार फैक्टरी, दो रिटेल स्टोर, इन सबके जरिए मेरी कोशिश रहती है कि जरूरतमंद बच्चों को अपने पास रखूं। आपको सच बताऊं तो मैं एक बनिया परिवार से हूं। मैं जिस परिवार से हूं, वहां लड़कियों पर बहुत बंदिश होती हैं। छह बजे के बाद घर से बाहर जाना नहीं होता है। 23 साल की उम्र में शादी हो जाती हैं। हमारे ऊपर जो अधिकतम खर्चा हमारी शादियों पर होता है। ऐसे में मेरे लिए बहुत मुश्किल था यह सफर। मेरे कभी फ्रेंड नहीं रहे। मैं हाथों से कार्ड बनाती थी और ऑटो से ग्वालियर डिलीवर करने जाती थी। छोटे-छोटे ऑर्डर लेती थी। इंस्टाग्राम आईडी भी इसलिए बनाई, क्योंकि मेरे पापा को इंस्टाग्राम चलाना नहीं आता था'। आगे बताया,' मैं अपनी मम्मी से बोलती की फ्रेंड के यहां पढ़ने जा रही हूं। फिर ग्वालियर से सुबह श्रीधाम एक्सप्रेस लेती थी। दिल्ली जाती थी। सदर बाजार उतरती थी। सामान खरीदती थी। छोटे-छोटे गिफ्ट्स खरीदती थी। 6.40 की जीटी एक्सप्रेस चलती थी। उसके फर्स्ट एसी में आती थी, जिससे माल लेकर आ सकूं अपने साथ। मैं रात साढ़े दस वापस ग्वालियर लौटती थी। फिर वहां से घर। मैं सामानों की फोटो इंस्टाग्राम पर पोस्ट करती थी। मेरे पास कोई इनवेस्टर नहीं था। आज भी मेरे पास कोई पार्टनर और इनवेस्टर नहीं है। मुझे लगता है कि यह बच्चों की दुआ है। एक लड़की के लिए ग्वालियर से यहां अमर उजाला के मंच तक आना मेरे लिए चमत्कार से कम नहीं।
लखन आपकी लाइफ में इस तरह का कोई चैलेंज रहा है। आप इन्फ्लुएंस बनने से पहले क्या कर रहे थे?
मैं क्रिकेट खेलता था। सोशल मीडिया मेरे प्लान में था ही नहीं। मुझे लगता था कि ये क्रिएटिव लोग करते हैं। अब लगता भी है कि यहां जितना सोचते हैं, उससे 10 गुना ज्यादा मेहनत लगती है। आप कोई मूवी देखते हैं, उसके गाने किसी ने लिखे हैं, स्क्रिप्ट किसी ने लिखी है। एक्टिंग किसी ने की है। आप सोशल मीडिया पर कंटेंट बनाते हैं तो आप स्क्रिप्ट भी लिख रहे हो, एडिट भी कर रहे हो, शूट भी कर रहे हो। यह हमसे कितनी डिमांड करता है, इस पर कभी बात ही नहीं हुई। मैंने कभी सुना ही नहीं कि यह प्रोफेशन भी हो सकते हैं। मैं कहूं तो चैलैंज यहां उतने नहीं हैं, जिस तरह के मैं बाहर जाकर मेहनत करने वाले लोगों को देखता हैं। अगर आप अपना दिमाग अच्छे से चलाना जातने हो। संसाधन हैं तो आप बेहतर कर सकते हो। आप जो बाहर जाकर संघर्ष करते हो, उससे बहुत कम है। हां, यहां के चैलेंज हैं लेकिन अलग तरह के हैं। हमें लोगों ने अपना प्यार दिया। हम उनके लिए कंटेंट बनाकर उनके विश्वास पर खरे उतर सकते हैं।
सोशल मीडिया ने आपकी कितनी लाइफ बदली नीतू?
नीतू बिष्ट ने कहा, 'मेरी तो लाइफ ही सोशल मीडिया है। मेरी मम्मी चाहती थीं कि मैं सरकारी नौकरी करूं। लेकिन मैं नौ से पांच की नौकरी नहीं करना चाहती थी। मैंने इंस्टाग्राम से शुरुआत की। फिर और भी बहुत से एप आए। मैंने और लखन ने साथ में वीडियो बनाना शुरू किया। कोविड लॉकडाउन था। हमने कंटेंट बनाना शुरू किया और लोगों ने बहुत प्यार दिया। वहीं से शुरुआत हुई। लखन तो क्रिकेट खेलते थे। मैं मॉडलिंग और शूट करती थी। मुझे लगता था कि मुझे कुछ और चाहिए। अब हमारे 15 यूट्यूब चैनल हैं। हर जगह अलग कंटेंट बनाना आसान नहीं है, लेकिन सोशल मीडिया ने हमें नाम दिया, लोगों ने इतना प्यार दिया। हम ब्लैस्ड हैं।
आपने और लखन ने साथ आने का फैसला कैसे लिया? किसने किसे प्रपोज किया?
नीतू ने कहा, 'हमारी शादी को दो साल हो गए हैं, लेकिन मैंने आज तक लखन को हां नहीं कहा'। लखन ने कहा, 'मैंने जिस चीज के लिए प्रपोज किया, वह काम हो गया। मैंने शादी के लिए प्रपोज किया और शादी हो गई'। लखन ने आगे बताया, 'मैं नीतू से मिला। हमने कुछ कंटेंट बनाया तो काफी नंबर मिले। हम लोगों ने साथ में मिलकर आगे बढ़ने का सोचा। लोगों को हमारी जोड़ी पसंद आने लगी। नीतू घर आती थी तो मम्मी को वह पसंद आने लगी। उन्होने कहा कि इसे बहू बना ले। फिर साथ में हमने काम किया। मैंने इस दौरान कहा कि तू मुझे अच्छी लगती है। मुझे गर्लफ्रेंड नहीं बनाना। शादी कर ले। उसके बाद नीतू ने अपने घर बात की और सब लोग मान गए।'
तान्या आपने 12वीं के बाद पढ़ाई नहीं की। इंग्लिश भी नहीं आती थी। फिर कैसे अंग्रेजी सीखी और क्यों जरूरत पड़ी?
हमारी मातृभाषा हिंदी है, लेकिन इंग्लिश बोलने वालों को बहुत ग्लैमरस माना जाता है। हालांकि, अब मुझे फर्क नहीं पड़ता।
नीतू अब हर कोई सोशल मीडिया से कमाने की सोच रहा है। कुछ लोग तो जॉब छोड़ रहे हैं। ऐसे लोगों के लिए क्या बताएंगी कि कैसे शुरुआत करें?
नीतू ने कहा, 'जो आपको पसंद हो उससे शुरुआत करें। अगर कुकिंग पसंद है तो कुकिंग से करें। गेमिंग पसंद है तो गेमिंग से। मुझे पता चला कि मुझे एक्टिंग करना पसंद है। सबसे यही कहूंगी कि आपको जो पसंद हो उससे शुरुआत करें। व्लॉगिंग पसंद है तो वह करें'। लखन ने इस दौरान शायरी सुनाई:
तेरी रजा मैं समझा ही नहीं
जब चाहा जिता दिया
जब चाहा हरा दिया
मैं क्या हूं ये खुद भी नहीं जानता मैं
कभी कहा उसने चांद मुझे कभी आसमान से गिरा दिया