महिलाओं के चुप रहने पर उठाया सवाल
ट्विंकल ने आगे लिखा कि आज भी महिलाएं अपने शरीर से जुड़ी प्राकृतिक प्रक्रियाओं पर खुलकर बात करने से हिचकिचाती हैं। उन्होंने सवाल उठाया- 'क्यों महिलाओं के हर मसले पर अब भी चुप्पी छाई रहती है? क्यों ये बातें टेबू मानी जाती हैं?' उन्होंने कहा कि समाज में अब वक्त आ गया है जब महिलाओं को अपने अनुभवों को साझा करने का हक खुलकर मिलना चाहिए- चाहे वो पीरियड्स हों, मेनोपॉज हो या फिर शरीर के दूसरे बदलाव।
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'अब मेरा शरीर मेरा साथ नहीं देता'
ट्विंकल ने कहा- 'पहले मैं और मेरी बॉडी एक ही हुआ करते थे। लेकिन अब वो थकने लगी है। अब मेरा शरीर मेरा साथ नहीं देता। उन्होंने बताया कि अब उन्हें पसीना बहाने के लिए कार्डियो की जरूरत नहीं पड़ती, गुस्सा आने के लिए कोई वजह नहीं चाहि और सहानुभूति महसूस करने के लिए इंसान की मौजूदगी भी जरूरी नहीं।