कैसे बने परफेक्शनिस्ट
1988 में अपने करियर की शुरूआत करने वाले आमिर खान ने साल 2000 के बाद फिल्में करने का अपना तरीका बदल दिया। बाकी कलाकारों की तरह ज्यादा से ज्यादा फिल्में करने की बजाय आमिर साल में सिर्फ एक फिल्म करने पर ही जोर देते हैं। उनका मानना है कि क्वालिटी मायने रखती है, क्वांटिटी नहीं। इसलिए एक साल में एक फिल्म करो, लेकिन ऐसी करो जो पूरे साल छाई रहे। आमिर ने इसी तरह से एक साल में एक फिल्म करके कमाई के रिकॉर्ड स्थापित किए।
सिर्फ कलाकार नहीं, एक्टिंग जीनियस भी हैं आमिर
आमिर खान सिर्फ एक्टर ही नहीं हैं, बल्कि उन्हें एक्टिंग जीनियस कहा जाता है। इंडस्ट्री के कई लोगों का ये कहना है कि आमिर का नजरिया और काम करने का तरीका सबसे अलग है। आमिर को अभिनय की बारीकियां पता हैं। टाइगर श्रॉफ जैसे कई नए कलाकारों ने अपने एक्टिंग करियर की शुरूआत से पहले आमिर से एक्टिंग के टिप्स लिए हैं।
सामाजिक मुद्दों पर भी रखते हैं अपनी बेबाक राय
इंडस्ट्री में कई ऐसे कलाकार हैं, अपने पेशे में तो महान हैं लेकिन सामाजिक मुद्दों पर अपनी राय रखने से कतराते हैं। हालांकि, आमिर इन कलाकारों से अलग हैं। वो अक्सर सामाजिक मुद्दों पर भी बेबाकी से अपनी राय रखते रहे हैं। फिर भले ही उन्हें इस वजह से आलोचनाओं का भी सामना करना पड़ा हो। उन्होंने 2012 में टीवी पर एक शो लाया था ‘सत्यमेव जयते’, जिसमें महिलाओं के साथ दुर्व्यवहार, बाल यौन शोषण, दहेज, ऑनर किलिंग, शराब, विकलांगता और घरेलू हिंसा जैसे गंभीर सामाजिक मुद्दों पर चर्चा की जाती थी।
अभिनेता के अलावा सफल निर्माता-निर्देशक भी हैं
आमिर खान सिर्फ एक अभिनेता ही नहीं हैं, बल्कि वो एक सफल निर्माता भी हैं। उनके आमिर खान प्रोडक्शंस के तहत बनी कई फिल्में सुपरहिट रही हैं। जिनमें हाल ही में ऑस्कर के लिए भेजी गई ‘लापता लेडीज’ भी शामिल है। इसके अलावा आमिर एक निर्देशक के रूप में भी काफी सफल रहे हैं। उन्होंने अब तक सिर्फ 2007 में आई ‘तारे जमीन पर’ का ही निर्देशन किया है। ये फिल्म भी सुपरहिट रही थी और फिल्म को कई अवॉर्ड्स भी मिले थे।
अवॉर्ड समारोह में नहीं होते हैं शामिल
आमिर खान की एक और बात जो उन्हें बाकियों से अलग करती है, वो है उनका अवॉर्ड फंक्शंस से दूरी बनाना। आमिर पिछले 32 सालों से नेशनल अवॉर्ड समारोह को छोड़कर किसी भी अवॉर्ड समारोह में शामिल नहीं होते हैं। इसको लेकर आमिर का कहना है कि ये बहुत ही सब्जेक्टिव और क्रिएटिव फील्ड है। फिल्मों में हम किसी को फर्स्ट या सेकंड कैसे बोल सकते हैं, क्योंकि आपकी फिल्म की कहानी अलग है। आमिर का मानना है कि बतौर भारतीय हम लोग बहुत भावुक हैं। हम लोग जज्बाती हैं, तो जब किसी को अवॉर्ड देने का वक्त आता है तो हम काम को अवॉर्ड नहीं देते, हम इंसान को अवॉर्ड देते हैं। जबकि उल्टा होना चाहिए। व्यक्ति कोई भी हो, उसका नाम कोई भी हो, उसके काम को हमें सराहना चाहिए।
फिल्मी पार्टियों से रहते हैं दूर
जो बॉलीवुड अपनी शानदार पार्टियों के लिए जाना जाता है, उस बॉलीवुड में आमिर खान शायद इकलौते ऐसे अभिनेता हैं, जो इन पार्टियों से दूर रहना ही पसंद करते हैं। एक बार करण जौहर के शो कॉफी विद करण में बॉलीवुड की पार्टियों के बारे में बात करते हुए आमिर कहते हैं इन पार्टियों में म्यूजिक इतना तेज होता है कि पास में खड़े होने के बावजूद गला फाड़-फाड़ कर चिल्लाना पड़ता है। वहीं उन्हें बॉलीवुड पार्टियों का देर रात शुरू होना और सुबह तक चलना भी नहीं पसंद है। हालांकि, आमिर अपने घर पर ही कई बार मशहूर कलाकारों, परिवार के सदस्यों और दोस्तों के साथ गेट टुगेदर जरूर करते हैं।
स्टेट लेवल टेनिस प्लेयर
एक्टिंग में मिस्टर परफेक्शनिस्ट आमिर खान स्पोर्ट्स में भी काफी आगे हैं। अभिनय की दुनिया में आने से पहले आमिर टेनिस खेलते थे। यही नहीं वो अपने स्कूल के दिनों में स्टेट लेवल के टेनिस प्लेयर रहे हैं। वो अंडर 12-14 ग्रुप में चैंपियन भी रहे हैं।