यूट्यूबर और बिग बॉस ओटीटी विनर एल्विश यादव को सुप्रीम कोर्ट से बड़ी राहत मिली है। कोर्ट ने उनके खिलाफ सांप के जहर की तस्करी और सेवन से जुड़े एक मामले में चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है।
अदालत ने क्या कहा?
जस्टिस एम सुरेश और एन कोटिश्वर सिंह की बेंच ने पाया कि एफआई दर्ज करने के तरीके में प्रक्रियात्मक खामियां थीं। यह भी कहा कि कानून की नजर में इन्हें सही नहीं माना जा सकता।
एल्विश यादव ने अपने खिलाफ दायर चार्जशीट और इस मामले में जारी समन को रद्द करवाने के लिए सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।
हाईकोर्ट ने रद्द की थी याचिका
पिछले साल मई में, इलाहाबाद हाई कोर्ट ने उनकी याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा था कि आरोपों की गहन कानूनी जांच जरूरी है, क्योंकि इस मामले में कई एफआईआर दर्ज की गई थीं।
क्या है मामला?
बता दें कि गौतमबुद्धनगर के नोएडा में दर्ज एफआईआर में एल्विश यादव पर वन्यजीव संरक्षण अधिनियम की विभिन्न धाराओं के तहत आरोप लगाए गए थे। एल्विश यादव को गौतमबुद्धनगर के प्रथम अतिरिक्त मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट ने भी एक समन जारी किया था।
यादव ने इस आधार पर चार्जशीट और कार्यवाही को चुनौती दी थी कि शिकायतकर्ता, वन्यजीव संरक्षण अधिनियम, 1972 के तहत एफआईआर दर्ज करने के लिए अधिकृत व्यक्ति नहीं थे। उन्होंने दलील दी थी कि आवेदक के पास से न तो कोई सांप, न ही कोई नशीला पदार्थ या साइकोट्रॉपिक पदार्थ बरामद हुआ है।
मामले को गंभीर बनाने की कोशिश की
एल्विश यादव ने अपनी याचिका में दलील दी 'सभी जानते हैं कि आवेदक एक प्रभावशाली व्यक्ति है और टेलीविजन पर कई रियलिटी शो में नजर आता है। ऐसे में, इस एफआई में आवेदक का नाम आने से मीडिया का ध्यान उसकी ओर खिंच गया। नतीजतन, इस मीडिया कवरेज से प्रभावित होकर, पुलिस अधिकारियों ने आवेदक को गिरफ्तार करने के तुरंत बाद कई दूसरी धाराएं लगाकर मामले को और भी ज्यादा गंभीर बनाने की कोशिश की।'