विष्णु पुराण
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हिरण्यकश्यपु ने प्रह्लाद को हर प्रकार से ईश्वर भक्ति से विचलित करने के लिए अनेक उपाय किए तथा उसको तरह-तरह की यातनाएं दीं, किंतु वह अपने पथ पर दृढ़ रहा। कहा जाता है, प्रह्लाद ने अपनी माता के गर्भ में ही सभी उपदेश सुने और याद रखे। अपनी भक्ति के कारण आगे चलकर वह भगवान विष्णु के प्रिय भक्त के रूप में विख्यात हुआ।