किसकी वजह से मुश्किल दौर से बाहर आए?
राम कपूर कहते हैं कि वह अपने बच्चों से बहुत प्यार करते हैं। अगर वह ना होते तो डिप्रेशन के दौर में खुद को कुछ बैठते लेकिन बच्चों के लिए उन्होंने खुद पर काम किया। राम कपूर कहते हैं, ‘अगर मेरे बच्चे नहीं होते, तो मैं भी वही करता जो हर्षद ने किया था। जब आपके बच्चे होते हैं, तो आप उनके लिए जीते हैं और आपको अपनी जिंदगी खत्म करने का कोई हक नहीं होता। बस इसी बात ने मुझे बचाया। यही एकमात्र कारण है कि मैं आज जिंदा हूं। 10 साल से ज्यादा हो गए हैं और आज मैं एक इंसान के तौर पर बहुत खुश हूं। गौतमी और मेरे बच्चों को भी अभी इसके बारे में पता चलेगा।’
बीते दिनों भी खोला था एक बड़ा राज
बीते दिनों ‘लॉकअप 2’ में राम कपूर ने बताया था कि उन्होंने पिता को मरने में मदद की थी। उनका कहना था, ‘मैंने अपने पिता की मौत की योजना बनाने में उनकी मदद की।’ राम कपूर ने बताया कि उनके पिता ने एक बार पैंक्रियाटिक कैंसर का सामना किया था, लेकिन 73 साल की उम्र में जब कैंसर दोबारा हुआ, तो वे फिर से इलाज नहीं करवाना चाहते थे। राम उनके साथ खड़े रहे और उनके फैसले का समर्थन किया।