कैसे बने रामायण के विभीषण?
मुकेश रावल थिएटर से जुड़े व्यक्ति थे। रामायण से पहले वह कई नाटकों में नजर आ चुके थे। रामानंद सागर से उनकी मुलाकात भी एक नाटक के दौरान ही हुई थी। रामानंद सागर ने उन्हें देखने के बाद मेघनाद और विभीषण के किरदार के लिए ऑडिशन देने का प्रस्ताव दिया। बाद में, उन्हें विभीषण के रोल के लिए फाइनल कर लिया गया।
कोई दूसरा कलाकार नहीं दे पाया मात
रामानंद सागर की रामायण में विभीषण से काफी ज्यादा लोकप्रियता हासिल की। इस किरदार को निभाने के बाद उन्हें कई तरह के प्रस्ताव आने लगे और उनके करियर की गाड़ी भी सरपट दौड़ने लगी। 1987 के इस शो के बाद कई बार रामायण सीरियल बनाया गया, लेकिन कोई भी कलाकार विभीषण के रोल में मुकेश रावल की बराबरी नहीं कर सका। साल 2002 में आए रामायण धारावाहिक में संदीप मोहन, साल 2008 के शो रामायण में विनोद कपूर, 2015 के शो सिया के राम में शैलेश गुलाबानी और 2024 के शो श्रीमद रामायण में कुणाल बख्शी ने विभीषण का किरदार निभाया, लेकिन कोई भी अभिनेता उन्हें मात नहीं दे सका।
हादसे ने बदल दी जिंदगी
मुकेश रावल दो बेटी और एक बेटे के पिता थे। साल 2000 के एक हादसे के बाद उनकी जिंदगी पूरी तरह से बिखर गई। उनके बेटे की ट्रेन से गिरकर मौत हो गई। इस दर्दनाक घटना ने मुकेश को अंदर से तोड़कर रख दिया। बेटे की मौत से वह इतना दुखी हुए कि उन्होंने काम तक छोड़ दिया। हालांकि, काफी प्रयासों के बाद उन्होंने अभिनय की दुनिया में वापसी की। साल 2016 में उनका शव कांदिवली रेलवे पटरी पर मिलने की खबर आई, जिसे सुनकर उनके प्रशंसक गम में डूब गए।
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