कहत हनुमान जय श्री राम
- फोटो : अमर उजाला ब्यूरो, मुंबई
अपनी बात को विस्तार से बताते हुए इंद्रमोहन कहते हैं, 'जब एकता कपूर ने धारावाहिक 'कहानी हमारे महाभारत की' बनाया तब उसमें उन्होंने किसी भी पांडव को सिर पर मुकुट नहीं पहनाया। उनके लेखकों का तर्क था कि शायद उस समय लोग मुकुट नहीं पहनते होंगे क्योंकि जब लड़ाइयां होती थी तो मुकुट जैसी चीजों को गिरने का खतरा रहता था। अब उस समय के लोगों की बनी हुई कोई तस्वीर तो है नहीं। इन लोगों का जिस तरह से बखान ग्रंथों और पुराणों में किया गया है, उसी तरह से पर्दे पर इनका चित्रण होता है। अब अपनी तरफ से इस तरह की चीजों को गढ़ लेना तो गलत ही है। लोगों ने अब तक जिन रूपों में उन्हें पढ़ा और टीवी पर देखा है, वह छवि उनके दिमाग में बनी हुई है। और, वह अपने देवताओं को उसी रूप में देखना चाहते हैं।'
पन्नू बताते हैं, 'वैसे एकता कपूर के ज्यादातर धारावाहिक सैकड़ों एपिसोड तक टीवी पर चलते हैं। शायद इसी का यह परिणाम है कि एकता का यह धारावाहिक मात्र 75 एपिसोड के बाद ही बंद हो गया। धारावाहिक में पांडवों की वेशभूषा पर तो बी आर चोपड़ा के 'महाभारत' में भीष्म पितामह की भूमिका निभाने वाले अभिनेता मुकेश खन्ना ने भी सवाल उठाए थे। उन्होंने एकता पर आरोप लगाया कि महाभारत जैसे पवित्र महाकाव्य का मजाक उड़ाया है। इस शो में पुरुष कलाकार अपने सिक्स पैक एब्स बनाकर और सीने पर उस्तरा चलवाकर आए। और महिला कलाकारों को ज्यादा अधकटे घटे ब्लाउज पहनाए गए। इसलिए, यह शो न तो दर्शकों ने पसंद किया और न ही समीक्षकों ने इसकी वाहवाही की।'
लेखकों पर सवाल उठाते हुए इंद्रमोहन कहते हैं कि आजकल के लेखक सिंथेटिक हो गए हैं। उन्होंने कहा, 'इस तरह के धारावाहिकों को लिखने वाले लेखकों का एक स्तर होना चाहिए। एक काल्पनिक धारावाहिक लिखना अलग बात है और इस तरह की धार्मिक कथाओं पर आधारित धारावाहिक लिखना बहुत बड़ी चीज है। इसके लिए शोध कार्य बहुत जरूरी है। जब 'महाभारत' बना, उस समय बी आर चोपड़ा के पास एक बड़ी शोध टीम थी। उन्होंने पुणे के एक कॉलेज से इसके तथ्यों पर गहराई से शोध किया था। लेकिन, आजकल कोई इतनी मेहनत नहीं करना चाहता। सब तकनीक के सारे चलना चाहते हैं। इस तरह न तो बनने वाला धारावाहिक धार्मिक रह पाता है और न ही काल्पनिक।'
धार्मिक कथाओं पर बने धारावाहिकों को बुजुर्ग तो देखते ही हैं, साथ ही युवा भी बड़े चाव से देखते हैं। आजकल का युवा तकनीक से पूरी तरह वाकिफ है और वह जानता है कि पिछले समय में इस तरह की चीजें बिल्कुल नहीं होंगी जैसी इन धारावाहिकों में दिखाई जाती हैं। और, बुजुर्गों को तो कथाएं सुनने, पढ़ने और पुराने धारावाहिकों को देखने के बाद ज्यादातर चीजें पता ही होती हैं। इंद्रमोहन कहते हैं कि अगर भगवान राम के परम भक्त रहे हनुमान के बारे में बिना जानकारी इकट्ठा किए कोई भी कहानी गढ़ी जाएगी तो वह तुरंत पकड़ में आ जाएगी। कलाकार चाहे जितनी भी मेहनत करें लेकिन कैमरा कभी झूठ नहीं बोलता। इनके जरिए लोगों की धार्मिक भावनाएं नहीं बदली जा सकतीं। इन्हीं दिक्कतों के चलते एंडटीवी का शो 'कहत हनुमान जय श्री राम' बंद होने जा रहा है। इस बारे में एंडटीवी की आधिकारिक प्रवक्ता की प्रतिक्रिया संपर्क किए जाने के बाद भी हासिल नहीं हो सकी है।