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सीएम बनने वाली पहली अभिनेत्री नहीं थीं जयललिता; ये दिग्गज भी राजनीति में उतरे, अब विजय बने नए मुख्यमंत्री

Sun, 10 May 2026 10:18 AM IST
गोधूलि श्रीवास्तव एंटरटेनमेंट डेस्क,अमर उजाला

सार

Vijay Thalapathy: दक्षिण भारत में सुपरस्टार से तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने का सफर तय करने वाले पहले एक्टर थे एमजी रामचंद्रन। उनके बाद जयललिता से लेकर पवन कल्याण तक कई कलाकारों ने राजनीति में अपना भाग्य आजमाया। अब अभिनेता थलापति विजय भी इस राह पर बढ़ चुके हैं। विजय तमिलनाडु के नए सीएम बन गए हैं। 
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थलापति विजय - फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
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30 जून 1977- यह वो तारीख है जो दक्षिण भारत की राजनीति और फिल्म जगत में बहुत बड़ा बदलाव लेकर आई। इस दिन साउथ के सुपरस्टार एमजीआर (मारुतूर गोपालन रामचन्द्रन) वो पहले अभिनेता बने, जिसने मुख्यमंत्री की गद्दी तक का सफर तय किया। इसके बाद ताे साउथ में दिग्गज फिल्मी अभिनेताओं का राजनीति में आना रिवाज सा बन गया। अब इसी क्रम में तमिलनाडु को विजय थलापति के रूप में एक और 'सुपरस्टार' मुख्यमंत्री मिल सकता है।
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चुनावों में टीवीके की शानदार जीत के बाद, थलापति विजय (जोसेफ विजय चंद्रशेखर) तमिलनाडु के नए मुख्यमंत्री बन सकते हैं। हालांकि, एमजीआर और थलापति विजय ही नहीं बल्कि साउथ की राजनीति में कई और फिल्मी सितारे भी उतरे हैं। इनमें से कुछ मुख्यमंत्री की कुर्सी तक भी पहुंचे हैं। जानते हैं लिस्ट में किन-किन के नाम शामिल हैं...

एम जी रामाचंद्रन - फोटो : सोशल मीडिया
एम जी रामाचंद्रन (एमजीआर) 
दिवंगत दिग्गज अभिनेता एमजीआर ने लगभग तीन दशक तक तमिल सिनेमा पर राज किया। 1936 में तमिल सिनेमा में कदम रखने वाले एम जी रामाचंद्रन ने शायद कभी नहीं सोचा होगा कि उनकी फैन फॉलोइंग इतनी बढ़ जाएगी कि लोग उन्हें अपना भगवान मानने लगेंगे। 1947 में फिल्म 'राजकुमारी' से स्टारडम ने एमजीआर के चुना और फिर हर फिल्म के साथ उनके फैंस की संख्या बढ़ती गई। 

राजनीति में सफर
1965 का वक्त ऐसा था जब कांग्रेस को जनता कमजोर कर रही थी। वहीं डीएमके अपनी पकड़ बनाने लगी हुई थी। एमजीआर अब भी एक्टर थे। मगर तमिलनाडु की बदलती हुई हवा देख रहे थे। शुरू में कांग्रेस से जुड़े एमजीआर ने डीएमके का दामन थामा पर फिर एम. करुणानिधि से मनमुटाव और सी.एन.अन्नादुराई की मृत्यु के बाद डीएमके ने एमजीआर से किनारा कर लिया।
इसके बाद तमिलनाडु की सबसे ताकतवर पार्टी एआईएडीएमके (AIADMK) की जन्म हुआ। इस पार्टी की सबसे बड़ी पूंजी थे एमजीआर के फैंस। 30 जून 1977 का वो दिन था जब एक्टर एमजीआर मुख्यमंत्री की गद्दी तक पहुंच गए। 1987 तक उन्होंने यह भूमिका निभाई। इसी कार्यकाल में उन्होंने मिड डे मील योजना की शुरुआत की जो बाद में पूरे देश में लागू की गई। 24 दिसंबर 1987 को एमजीआर का निधन हो गया। एमजीआर को फैंस ने इतिहास के सुनहरे पन्ने के खिताब से नवाजा।

जयललिता - फोटो : सोशल मीडिया
जयललिता
साउथ इंडस्ट्री ने जयललिता को प्यार के साथ सम्मान भी दिया। जयललिता के लिए बचपन से ही कुछ भी आसान नहीं रहा। ऐसा कहना गलत नहीं होगा कि उन्होंने फिल्मी दुनिया को नहीं चुना बल्कि फिल्मों ने जया के चुना था। 15 साल की उम्र में जया ने अपनी पहली फिल्म 'एपिसल' में काम किया।
इसके बाद कन्नड़ फिल्म 'चिन्नदा गोम्बे' मुख्य रूप से उनकी साउथ की पहली फिल्म बनी। पूरे करियर में जयललिता ने करीब 140 फिल्मों में काम किया जिसमें से 28 हिट फिल्में उन्होंने दिग्गज अभिनेता एमजीआर के साथ कीं। एमजीआर के साथ उनका नाम भी जोड़ा जाता था।

राजनीति में सफर
फिल्मों में एक सफल करियर पूरा होने के के बाद जयललिता ने राजनीती में कदम रखा। उन्होंने एमजीआर की पार्टी एआईएडीएमके की सदस्ता ली। 1984 में वो राज्यसभा सदस्य बनीं। 1987 में पार्टी सुप्रीमो एमजीआर की मृत्यु के बाद जया ने खुद को उनकी राजनीतिक उत्तराधिकारी के रूप में स्थापित किया।
इसके बाद 25 मार्च 1989 को आया तमिलनाडु की राजनीति के इतिहास का वो काला दिन जब जयललिता की एक शपथ ने कुर्सी और राज्य दोनों की किस्मत बदल दी। इस दिन तमिलनाडु की विधानसभा में डीएमके विधायकों ने जयललिता के साथ सरेआम मारपीट की। वो बिखरे बालों, फटी साड़ी और आंखों में आंसू लिए विधानसभा से बाहर चली गईं।
इस घटना में वो बेइज्जत हुईं लेकिन इसी से उनको सत्ता में आने का मौका मिला। 1991 में पहली बार जयललिता की शपथ पूरी हुई और वो तमिलनाडु की मुख्यमंत्री बनीं। आगे अपने जीवन में कई राजनीतिक उतार-चढ़ाव देखने के बाद 5 दिसंबर 2016 को उनका निधन हो गया। 
कई लोगों को लगता है कि जयललिता पहली अभिनेत्री थीं जो मुख्यमंत्री बनीं पर उनसे पहले एमजीआर की पत्नी और पूर्व अभिनेत्री वीएन जानकी ने यह पद संभाला था। एमजीआर के निधन के बाद वो 24 दिनों के लिए सीएम पद पर रही थीं।

एन टी रामा राव - फोटो : सोशल मीडिया
एन टी रामा राव 
साल 1949 में एन टी रामा राव उर्फ नंदमुरी तारक रामा राव ने अपनी पहली फिल्म 'मन देसम' की थी। 1951 में पाथला भैरवी उनकी सबसे पहली हिट फिल्म थी। 1960 के दशक में वो अपनी पौराणिक फिल्मों के लिए मशहूर हुए। आगे अपने लगभग 40 दशक के करियर में एन टी रामा राव ने 300 फिल्में की। इनमें से ज्यादातर सफल रहीं और उनमें एन टी रामा राव ने भगवान का किरदार निभाया। करीब 16 फिल्मों में कृष्ण का किरदार निभाने के बाद फैंस उन्हें भगवान की तरह ही पूजने लगे।

राजनीति में सफर
राजनीति में आने के लिए एन टी रामा राव ने 29 मार्च 1982 को तेलुगु देशम पार्टी की स्थापना की। 9 महीने के अंदर ही वो मुख्यमंत्री बन गए। अपने राजनैतिक सफर में वो सात साल में चार बार आंध्र प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। 1984 में उन्हें बर्खास्त कर दिया गया था मगर जनता के प्यार और सर्मथन के बाद वो वापस लौटे। 1995 में एन टी रामा राव के जीवन में मोड़ तब आया जब उनके दामाद नारा चंद्रबाबू नायडू ने घरेलू विवाद के चलते पार्टी में तख्तापलट किया। एन टी रामा राव को मुख्यमंत्री पद से इस्तीफा देना पड़ा और चंद्रबाबू नायडू अगले मुख्यमंत्री बने।

रजनीकांत - फोटो : सोशल मीडिया
रजनीकांत
रजनीकांत मे अपने फिल्मी करियर की शुरूआत 1975 में की थी। उनकी पहली फिल्म के. बालाचंदर की 'अपूर्वा रागंगल' थी। इसमें उनके साथ कमल हासन भी थे। फिल्म सुपरहिट रही और अपने करियर के शुरुआती 10 साल में रजनीकांत ने लगभग 100 फिल्में कर डालीं।
80 और 90 के दशक में रजनीकांत ने साउथ में अमिताभ बच्चन की कई फिल्मों के रीमेक में लीड रोल निभाए। 'डॉन' की रीमेक 'बिल्ला' और 'लावारिस' के रीमेक 'पणक्कारण' में लीड रोल निभाकर रजनी को सुपरस्टारडम मिला। 
आगे रजनी ने कई बॉलीवुड फिल्में भी कीं। इसके अलावा उनकी कई साउथ फिल्में जैसे 'शिवाजी: द बॉस', 'रोबोट', 'कबाली' और 'जेलर' भी डब होकर हिंदी दर्शकों के बीच मशहूर हुईं। रजनीकांत आखिरी बार इसी साल रिलीज हुई फिल्म ‘कुली’ में नजर आए थे। अपने 5 दशक से भी लंबे करियर में रजनी ने करीबन 170 फिल्मों में काम किया।

राजनीति में सफर
एक वक्त था जब फैंस राजनीकांत के अभिनेता से नेता बनने बेसब्री से इंतजार कर रहे थे। 1996 में रजनीकांत ने पहली बार कोई राजनैतिक बयान दिया। उन्होंने कहा कि 'अगर जयललिता को दोबारा चुना गया, तो भगवान भी तमिलनाडु को नहीं बचा सकते'।
रजनी के इस एक बयान से डीएमके-टीएमसी गठबंधन को जीत हासिल करने में काफी मदद मिली। इसके बाद 2017 में खबर आई कि रजनीकांत भी राजनीति में उतरेंगे और 2021 में होने वाले तमिलनाडु विधानसभा चुनाव लड़ेंगे पर कोरोना काल के दौरान तबियत खराब होने की बात कहकर वो पीछे हट गए थे।
जुलाई 2021 में उन्होंने अपनी पार्टी रजनी मक्कल मंदरम को भंग कर दिया और राजनीति से संन्यास ले लिया।

कमल हासन - फोटो : सोशल मीडिया
कमल हासन
कमल हासन एक ऐसा नाम है जो सिर्फ साउथ सिनेमा ही नहीं बल्कि बॉलीवुड के भी एक दिग्गज स्टार हैं। उन्होंने 5 साल की उम्र में फिल्मी दुनिया में कदम रखा। जिसके बाद कई फिल्मों में काम किया मगर बॉलीवुड में पहली बार वो 1981 में बनी फिल्म 'एक दूजे के लिए' में दिखे। जिसके बाद एक्टर की पॉपुलरटी बढ़ती चली गई। उनकी सदमा (1983), सागर (1985), चाची 420 (1997) फैंस को काफी पसंद आईं। उन्होंने 'दशावतारम' और 'विश्वरूपम' जैसी फिल्मों में एक साथ कई किरदार भी निभाए। 66 साल के करियर में कमल अब तक 250 फिल्मों में काम कर चुके हैं। उनकी आखिरी फिल्म पिछले साल आई 'ठग लाइफ' थी। आगे वो 'कल्कि 2' और 'इंडियन 3' के अलावा रजनीकांत के साथ भी एक फिल्म में नजर आएंगे।

राजनीति में सफर
फरवरी में उन्होंने मक्कल नीधि मय्यम (एमएनएम) पार्टी की शुरुआत की थी। 2019 और 2021 के चुनावी उतार-चढ़ाव के बाद पार्टी ने डीएमके से गठबंधन किया। वह जुलाई 2025 में राज्य सभा सांसद के रूप में चुने गए। आज भी तमिलनाडु की राजनीति में एक्टिव हैं।

विजयकांत - फोटो : सोशल मीडिया
विजयकांत 
तमिल सिनेमा के एक्टर दिवंगत विजयकांत का नाम भी ऐसे एक्टर्स में आता है जो अभिनेता से नेता बने थे। फिल्मी सफर विजयकांत के लिए इतना आसान नहीं था। शुरुआती 2 साल में कई रिजेक्शन झेलने से बाद 'दूरथु इदि मुझक्कम' से उन्हें पहचान मिली। उनकी एक्टिंग को सराहा गया, विजयकांत को फैंस से भी बहुत प्यार मिला। 'नाल' और 'वैधेगी काथिरुंधाल '(दोनों 1984 में) फिल्मों से विजयकांत के करियर का ग्राफ पूरी तरह बदल गया। कैप्टन प्रभाकरन (1991) के आने तक, वे एक अभिनेता से स्टार बनने की ओर कदम बढ़ा चुके थे। 

राजनीति में सफर
एक सफल फिल्मी करियर के बाद विजयकांत ने अपना रुख राजनीति की तरफ कर लिया। उन्होंने देसिया मुरपोक्कु द्रविड़ कड़गम (डीएमडीके) नाम की पार्टी  की स्थापना की। 2006 में विजयकांत की पार्टी पहली बार तमिलनाडु के चुनाव में उतरी। इसके साथ पहले ही चुनाव में विजयकांत की पार्टी 8.4 प्रतिशत सीट जीतने में कामयाब रही। विजयकांत विरुधाचलम निर्वाचन क्षेत्र से चुनाव जीत गए। 2011 में विजय की पार्टी ने एआईएडीएमके के साथ गठबंधन की सरकार के साथ 29 सीटें जीतीं और विपक्ष के नेता के रूप में उभरे। 

पवन कल्याण - फोटो : सोशल मीडिया
पवन कल्याण
पवन कल्याण ने 1996 में फिल्मी दुनिया में कदम रखा था। उन्होंने 'अक्कदा अम्मायी इक्कदा अब्बायी' से अपनी शुरुआत की और 'गोकुलमलो सीता' और 'सुस्वागाथम' जैसी फिल्मों से जल्द ही स्टारडम हासिल कर लिया। साउथ के पावर स्टार कहे जाने वाले पवन कल्याण ने अब तक 31 फिल्मों में काम किया है। इनमें 'थोली प्रेमा', 'कुशी', 'गब्बर सिंह' और 'भीमला नायक' जैसी हिट फिल्में और कुछ हिट हिंदी फिल्मों की रीमेक भी शामिल हैं।

राजनीति में सफर
अभिनेता से राजनेता बने पवन कल्याण ने 2014 में जन सेना पार्टी (जेएसपी) की स्थापना की थी। जिसके बाद 2019 के आंध्र प्रदेश के चुनाव में उनकी कमजोर शुरुआत रही। हालांकि, 2024 में विधानसभा चुनावों में पवन कल्याण ने जीत हासिल की। इसके साथ 21 सीटें जीत कर वो उपमुख्यमंत्री बने। 
 
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थलापति विजय - फोटो : सोशल मीडिया
थलापति विजय
साउथ के मशहूर एक्टर थलापति विजय निर्देशक एस.ए चंद्रशेखर के बेटे हैं। फिल्मी दुनिया से परिवारिक जुड़ाव की वजह से विजय बचपन से ही सिनेमा का हिस्सा रहे। उन्होंने 18 साल की उम्र में बतौर लीड एक्टर 'नालैया थीरपु' से फिल्मी दुनिया में कदम रखा।
1996 में रिलीज हुई फिल्म 'कोयंबटूर मप्पिलाई' से उन्हें कमर्शियल सक्सेस मिली। 2006 में रिलीज हुई फिल्म 'घिल्ली' में एक्ट्रेस तृषा कृष्णन के साथ विजय की जोड़ी को दर्शकों ने काफी पसंद किया। अब तक विजय 'थेरी', 'मर्सेल', 'मास्टर' और 'लियो' जैसी सुपरहिट फिल्में दे चुके हैं। फैंस को अब उनकी फिल्म 'जन नायकन' की रिलीज का इंतजार है। 

राजनीति में सफर
विजय ने 2 फरवरी 2024 में तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) की स्थापना की। इसके बाद एक्टर ने आधिकारिक रूप से राजनीति में प्रवेश किया। 2026 के तमिलनाडु विधानसभा चुनाव में विजय पूरी तरह से राजनीति में उतरे। चुनाव परिणामों में उनकी पार्टी टीवीके को शानदार सफलता मिली और प्रदेश की सबसे बड़ी पार्टी बनी। अब गठजोड़ के बाद थलापति विजय तमिलनाडु के मुख्यमंत्री बनने वाले 9वें व्यक्ति बन गए हैं।
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