चिदानंद एस नाइक की फिल्म 'सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो' ने कान फिल्म फेस्टिवल में ला सिनेफ का प्रथम पुरस्कार अपने नाम किया है। ये फिल्म कन्नड़ लोक कथा पर आधारित है। वहीं, तीसरा पुरस्कार मानसी माहेश्वरी की एनीमेशन फिल्म 'बन्नीहुड' को मिला है।
77वें कान फिल्म फेस्टिवल में चिदानंद एस नाइक की फिल्म 'सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो' को गुरुवार को ला सिनेफ का प्रथम पुरस्कार मिला। ये कान में भारत की एक सबसे बड़ी जीत है। मैसूर के डॉक्टर से फिल्म निर्माता बने इस अभिनेता ने यह फिल्म पुणे के भारतीय फिल्म एवं टेलीविजन संस्थान के टेलीविजन विंग में अपने एक साल के कौर्स के दौरान बनाई थी।
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मानसी माहेश्वरी की फिल्म को मिला तीसरा अवॉर्ड
फिल्म 'सनफ्लावर वेयर द फर्स्ट वन्स टू नो' कन्नड़ लोक कथा पर आधारित है। इसकी कहानी एक बूढ़ी महिला के बारे में है। इस फिल्म ने कान फिल्म फेस्टिवल में ला सिनेफ का पहला पुरस्कार जीत कर बड़ी कामयाबी हासिल की है। ला सिनेफ प्रतियोगिता का तीसरा पुरस्कार मेरठ की मानसी माहेश्वरी की एनीमेशन फिल्म 'बन्नीहुड' ने अपने नाम किया है।
इन दो फिल्मों ने साझा किया दूसरा पुरस्कार
मेरठ में जन्मीं और एनआईएफटी दिल्ली की पूर्व छात्रा मानसी माहेश्वरी ने ब्रिटेन के राष्ट्रीय फिल्म एवं टेलीविजन स्कूल की छात्रा के रूप में यह फिल्म बनाई थी। वहीं, कान ला सिनेफ का दूसरा अवॉर्ड कोलंबिया विश्वविद्यालय के आसिया सेगालोविच द्वारा निर्देशित 'आउट ऑफ द विडो थ्रू द वॉल' और अरस्तू विश्वविद्यालय के निकोस कोलिउकोस द्वारा निर्मित 'द कैओस शी लेफ्ट बिहाइंड' ने साझा किया।
पांच सालों में भारत का दूसरा पुरस्कार
कान फिल्म फेस्टिवल में प्रथम पुरस्कार विजेता को 15,000 यूरो, धावक को 11,250 यूरो और तीसरे पुरस्कार को 7,500 यूरो दिए जाते हैं। ला सिनेफ में अवॉर्ड जीतने वालीं फिल्में 3 जून को सिनेमा डू पैंथियन में और 4 जून को एमके2 क्वाई डे सीन में प्रदर्शित की जाएंगी। बता दें कि नाइक को मिला पहला पुरस्कार पिछले पांच सालों में भारत का दूसरा पुरस्कार है। साल 2020 में एफटीआईआई की ही अश्मिता गुहा नियोगी ने अपनी फिल्म 'कैटडॉग' के लिए अवॉर्ड जीता था।