4 साल की उम्र में कैमरे का सामना
जहां आम बच्चे चार साल की उम्र में स्कूल जाना शुरू करते हैं, वहीं श्रीदेवी इस उम्र में कैमरे के सामने एक्टिंग कर रही थीं। उनका पहला अभिनय अनुभव तमिल फिल्म ‘कंधन करुणई’ में एक बाल कलाकार के रूप में हुआ। अभिनय की इस पहली झलक ने ही यह संकेत दे दिया था कि यह बच्ची एक दिन बड़ा नाम बनेगी।
बाल कलाकार से हिंदी फिल्मों की ओर
तमिल फिल्मों में सफल शुरुआत के बाद श्रीदेवी ने महज नौ साल की उम्र में हिंदी फिल्म ‘रानी मेरा नाम’ से बॉलीवुड में अपनी मौजूदगी दर्ज कराई। बचपन से ही अभिनय की पकड़ इतनी मजबूत थी कि वह हर किरदार में पूरी तरह ढल जाती थीं।
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1 करोड़ रुपए की फीस पाने वाली पहली अभिनेत्री
80 और 90 के दशक में जब अभिनेत्रियों को पुरुष कलाकारों की तुलना में कम फीस मिलती थी, तब श्रीदेवी ने यह मिथक तोड़ा। वह बॉलीवुड की पहली अभिनेत्री बनीं जिन्हें एक फिल्म के लिए 1 करोड़ रुपए तक की फीस दी गई। यह उस समय के हिसाब से एक बड़ी उपलब्धि थी, जो उनके स्टारडम और प्रभाव का प्रतीक था।
महज 13 साल की उम्र में निभाया मां का किरदार
श्रीदेवी का अभिनय हमेशा उम्र और किरदार की सीमाओं से परे रहा। उन्होंने 13 साल की उम्र में फिल्म ‘मंदरू मुदिचू’ में रजनीकांत की सौतेली मां का रोल निभाया। यह किरदार आसान नहीं था, क्योंकि इसमें एक परिपक्व महिला की भूमिका थी। लेकिन श्रीदेवी ने इस भूमिका को इतनी संजीदगी से निभाया कि दर्शक उनकी उम्र को भूल गए।
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रजनीकांत से गहरी दोस्ती
‘मंदरू मुदिचू’ फिल्म के बाद श्रीदेवी और रजनीकांत के बीच एक मजबूत दोस्ती की शुरुआत हुई। दोनों ने साथ में 20 से ज्यादा फिल्मों में काम किया। फिल्मी पर्दे पर उनकी जोड़ी दर्शकों को खूब पसंद आई। एक समय ऐसा भी आया जब रजनीकांत की तबीयत खराब हुई, और श्रीदेवी ने उनके लिए उपवास रखे – यह उनके गहरे रिश्ते को दर्शाता है।
पांच भाषाओं में अभिनय का जादू
श्रीदेवी केवल हिंदी फिल्मों तक सीमित नहीं रहीं। उन्होंने तमिल, तेलुगू, मलयालम और कन्नड़ फिल्मों में भी काम किया। हर भाषा में उनकी लोकप्रियता और प्रशंसा देखने लायक थी। वह उन चंद अभिनेत्रियों में से थीं जिन्होंने पैन-इंडिया स्तर पर एक जैसी लोकप्रियता हासिल की।
प्रसिद्ध फिल्में और यादगार किरदार
श्रीदेवी ने अपने करियर में तकरीबन 300 फिल्मों में काम किया। ‘चांदनी’, ‘लम्हे’, ‘नगीना’, ‘चालबाज’, ‘सदमा’, ‘मिस्टर इंडिया’, ‘खुदा गवाह’, और ‘जुदाई’ जैसी फिल्मों में उनके किरदार आज भी याद किए जाते हैं। खासकर ‘चालबाज’ में उनका डबल रोल और ‘सदमा’ में उनकी मासूमियत ने दर्शकों को भावुक कर दिया।
श्रीदेवी को मिलने वाले अवॉर्ड्स
श्रीदेवी को उनके सशक्त अभिनय के लिए कई प्रतिष्ठित पुरस्कारों से नवाजा गया, जिनमें भारत सरकार द्वारा प्रदत्त पद्मश्री (2013) प्रमुख है। उन्होंने फिल्म 'मॉम' के लिए मरणोपरांत राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार मिला। इसके अलावा श्रीदेवी ने फिल्मफेयर पुरस्कार भी विभिन्न भाषाओं और श्रेणियों में कई बार जीते, जैसे चालबाज-लम्हे के लिए।
उन्हें तेलुगु, तमिल और मलयालम सिनेमा में भी शानदार परफॉर्मेंस के लिए राज्य स्तरीय सम्मान प्राप्त हुए। जीवन के अंतिम वर्षों में भी इंग्लिश विंग्लिश जैसी फिल्मों के जरिए उन्होंने नई पीढ़ी को अपनी प्रतिभा से प्रभावित किया, जिसके लिए उन्हें कई आधुनिक सम्मान जैसे स्टारडस्ट अवॉर्ड्स भी प्राप्त हुए।