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Squid Game 2: दर्शकों पर इतना क्यों छाया हुआ है 'स्क्विड गेम' का खुमार, जानिए क्या है साइकेट्रिस्ट की राय

Fri, 27 Dec 2024 06:59 PM IST
साक्षी एंटरटेनमेंट डेस्क, अमर उजाला

सार

Squid Game 2: स्क्विड गेम का दूसरा सीजन रिलीज हो चुका है, जो आते ही दर्शकों के बीच लोकप्रिय हो गया। इस तरह की साइकोलॉजिकल थ्रिलर सीरीज के प्रति लोग क्यों आकर्षित होते हैं, इस बारे में अमर उजाला ने साइकेट्रिस्ट डाॅ ओम प्रकाश से बातचीत की...
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स्क्विड गेम पर साइकेट्रिक से बातचीत - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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'स्क्विड गेम' का पहला सीजन दिलचस्प मोड़ पर खत्म हुआ, जिसमें जी हुन ने भयावह खेल के पीछे के मास्टरमाइंड से बदला लेने की कसम खाई, जहां हारने का मतलब मौत थी। स्क्विड गेम का बहुप्रतीक्षित दूसरा सीजन 26 दिसंबर को रिलीज हुआ। भारत में यह सीरीज खूब लोकप्रिय हुई और दर्शक इस सीरीज की ओर आकर्षित हुए। वर्तमान में यह देखा गया है कि भारतीय दर्शक ऐसी सीरीज के प्रति बहुत ज्यादा आकर्षित हैं, जिसमें बहुत ज्यादा खतरनाक दृश्य दिखाए हैं। ऐसी साइकोलॉजिकल थ्रिलर सीरीज के प्रति लोग क्यों आकर्षित होते हैं, इस बारे में अमर उजाला ने साइकेट्रिस्ट डाॅ ओम प्रकाश से बातचीत की, जो मनोचिकित्सा के प्रोफेसर एवं इहबास के उप-मेडिकल अधीक्षक हैं। चलिए मनोचिकित्सक दृष्टि से जानते हैं कि भारत में ऐसी सीरीज क्यों लोकप्रिय हो रही हैं और इसके क्या फायदे और नुकसान हैं। जानिए क्या हैं साइकेट्रिस्ट डाॅ ओम प्रकाश की राय...

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स्क्विड गेम - फोटो : इंस्टाग्राम @netflixin
डाॅ ओम प्रकाश कहते हैं, 'स्क्विड गेम भारत में इसलिए लोकप्रिय है, क्योंकि इसके विषय हमारे सामाजिक और मानसिक यथार्थ से गहराई से जुड़े हुए हैं। मनोचिकित्सक के रूप में मैं इसके कुछ सकारात्मक और नकारात्मक पहलू देखता हूं...

सकारात्मक पहलू
1. जुड़ावपूर्ण संघर्ष

शो में आर्थिक संघर्ष और असमानता को दिखाया गया है, जो भारत के कई लोगों की वास्तविक चुनौतियों को दर्शाता है। यह दर्शकों को भावनात्मक रूप से जोड़ता है।
2. भावनात्मक राहत
कठिन परिस्थितियों में जीवित रहने वाले चरित्रों को देखना दर्शकों को अपनी चिंताओं को एक काल्पनिक और सुरक्षित तरीके से समझने और राहत पाने का मौका देता है।
3. नैतिक द्वंद्व और आत्मचिंतन
शो में दिखाए गए नैतिक विकल्प दर्शकों को आत्ममंथन करने और विश्वास, मूल्यों और अस्तित्व पर चर्चा करने के लिए प्रेरित करते हैं।
4. सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता
यह शो समाज में असमानता, शक्ति और वर्ग विभाजन पर ध्यान आकर्षित करता है, जो सोचने पर मजबूर करता है।
5. सांस्कृतिक आकर्षण
भारतीय दर्शक बलिदान, संघर्ष और उच्च भावनात्मक स्तर की कहानियों से स्वाभाविक रूप से आकर्षित होते हैं, और यह शो इन्हीं तत्वों को प्रभावशाली ढंग से प्रस्तुत करता है।

स्क्विड गेम सीजन 2 - फोटो : सोशल मीडिया
नकारात्मक पहलू
1. हिंसा और क्रूरता
शो में अत्यधिक हिंसा और क्रूरता दिखाई गई है, जो मानसिक रूप से संवेदनशील लोगों को नकारात्मक रूप से प्रभावित कर सकती है। यह विशेष रूप से किशोरों और बच्चों के लिए हानिकारक हो सकता है।
2. नैतिक मूल्य कमजोर करना
शो में दिखाए गए चरित्रों की स्वार्थी और धोखेबाज प्रवृत्तियां नैतिक मूल्यों को कमजोर कर सकती हैं, जिससे दर्शकों पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।
3. मानसिक स्वास्थ्य पर असर
शो की गहन और तनावपूर्ण सामग्री मानसिक स्वास्थ्य पर असर डाल सकती है, खासकर उन लोगों पर जो पहले से ही तनाव या चिंता से जूझ रहे हैं।
4. सामाजिक मान्यताओं पर प्रभाव
ऐसी कहानियां सामाजिक मान्यताओं को धूमिल कर सकती हैं, जहां धन और अस्तित्व को प्राथमिकता दी जाती है और नैतिकता को नजरअंदाज किया जाता है।
5. नशे की लत जैसा प्रभाव
शो का तेज गति और अप्रत्याशित घटनाएं लोगों में इसके प्रति नशे की लत जैसा प्रभाव डाल सकती हैं, जो समय प्रबंधन और मानसिक स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।
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स्क्विड गेम सीजन 2 - फोटो : इंस्टाग्राम
स्क्विड गेम भारतीय दर्शकों को भावनात्मक जुड़ाव, सामाजिक मुद्दों पर जागरूकता और मनोरंजन का एक अनोखा मिश्रण प्रदान करता है, लेकिन इसकी अत्यधिक हिंसा, तनावपूर्ण सामग्री, और नैतिक प्रभावों के कारण, यह मानसिक स्वास्थ्य के लिए कुछ चुनौतियां भी प्रस्तुत करता है। यह महत्वपूर्ण है कि दर्शक इसे संतुलित तरीके से देखें और इसके संदेशों को समझने की कोशिश करें।
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