मशहूर सिनेमैटोग्राफर दिलीप रे का 72 साल की उम्र में निधन हो गया। दिलीप ने शुक्रवार को भुवनेश्वर के एक निजी अस्पताल में अपनी अंतिम सांस ली। उनके परिवार द्वारा दी गई जानकारी के अनुसार वह कुछ समय से बीमार चल रहे थे। दिलीप के निधन पर ओडिशा सीएम मोहन चरण माझी ने भी सोशल मीडिया के जरिए दुख व्यक्त किया।
अस्पताल में चल रहा था इलाज
सिनेमैटोग्राफर दिलीप रे के परिवार ने शनिवार को उनके निधन की जानकारी साझा की। परिवार ने बताया कि 72 वर्षीय दिलीप बीते कुछ वक्त से बीमार थे। इलाज के दौरान भुवनेश्वर स्थित एक निजी अस्पताल में शुक्रवार को उन्होंने दम तोड़ दिया। दिलीप का जन्म 27 जुलाई 1954 को कटक में हुआ था। पढ़ाई पूरी करने के बाद वह अपना करियर बनाने बंगलुरू स्थित फिल्म एंड टेलीविजन इंस्टीट्यूट पहुंचे थे।
सीएम मोहन चरण माझी, दिलीप रे
- फोटो : सोशल मीडिया
मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने किया पोस्ट
दिग्गज सिनेमैटोग्राफर दिलीप रे के निधन के बाद ओडिसा के मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी भी सोशल मीडिया पर अपना दुख जताया। उन्होंने लिखा, 'ओडिया फिल्म उद्योग को समृद्ध करने में उनका असाधारण कलात्मक योगदान हमेशा यादगार रहेगा। उनका जाना हमारी कला और संस्कृति की दुनिया के लिए एक अपूरणीय क्षति है।'
पांच बार जीता ओडिशा राज्य फिल्म पुरस्कार
दिलीप रे का ओडिया और बंगाली सिनेमा में बड़ा योगदान रहा है। उन्होंने अपने जीवनकाल में पांच बार ओडिशा राज्य फिल्म पुरस्कार जीता। इसके साथ ही अपने करियर में 80 से अधिक ओडिया फीचर फिल्मों, लगभग 15 बंगाली फिल्मों और कई छत्तीसगढ़ी प्रस्तुतियों में काम किया।
इसके अलावा रे ने कई डॉक्यूमेंट्री और टेलीविजन धारावाहिकों में भी काम किया है। अपने फिल्मा सफर में सबसे ज्यादा प्रसिद्धी उन्हें 'तिसंध्या', 'बाजे बैंसी नाचे घुंगुरा', 'चका भौंरी', 'ई ता दुनिया', 'ममता रा डोरा', 'माझी पहाचा' और 'बिधिरा बिधाना' जैसी ओडिया फिल्मों के लिए हासिल हुई।