क्या है पूरा मामला?
आपको बदा दें कि केवीएन प्रोडक्शंस ने मंगलवार को मद्रास हाई कोर्ट में सर्टिफिकेशन प्रोसेस को तेज करने के लिए एक याचिका दायर की थी। उन्हें 5 जनवरी को एक ईमेल मिला, जिसमें कहा गया था कि फिल्म को एक जांच कमेटी के पास भेज दिया गया है। यह तब हुआ जब सीबीएफसी ने दावा किया कि उन्हें एक शिकायत मिली है, जिसमें कहा गया है कि फिल्म 'धार्मिक भावनाओं को ठेस पहुंचाती है।'
अदालत ने सेंसर बोर्ड से मांगा जवाब
फिल्म के निर्माताओं का दावा है कि सेंसर बोर्ड ने 19 दिसंबर, 2025 को फिल्म देख ली थी और मौखिक रूप से बताया था कि इसे यूए 16+ सर्टिफिकेट दिया जाएगा। मेकर्स ने कट्स और बदलावों का भी पालन किया था। कोर्ट ने सेंसर बोर्ड से देरी की वजह पूछी है। अदालत ने 9 जनवरी को फिल्म रिलीज करने की मेकर्स की जल्दबाजी पर भी सवाल उठाया है। प्रोड्यूसर्स ने कोर्ट को बताया कि उनके 500 करोड़ रुपये दांव पर लगे हैं।