तमिलनाडु में ‘द राजा साब’ को बड़ा मौका
ट्रेड एक्सपर्ट ने तमिलनाडु के बदले हालात पर बात करते हुए कहा कि आमतौर पर तमिलनाडु थलपति विजय का मजबूत गढ़ माना जाता है, लेकिन इस बार स्थिति अलग है। ‘जन नायकन’ के रिलीज से बाहर होने के बाद वहां जो खाली जगह बनी है, वह ‘द राजा साब’ के लिए बड़ा मौका बन गई है। प्रभास को वहां पहले के मुकाबले बेहतर ट्रैक्शन मिल रहा है और थिएटर मालिक भी ज्यादा शो देने में सहज नजर आ रहे हैं। जब ऑडियंस के सामने ऑप्शन कम होते हैं, तो फिल्म को उसका सीधा फायदा मिलता है।
वर्ड ऑफ माउथ को लेकर ट्रेड एक्सपर्ट का कहना है कि कम कॉम्पिटिशन का असर शुरुआती कुछ दिनों के बाद साफ दिखता है। अगर फिल्म का कंटेंट ऑडियंस को पसंद आ गया, तो पॉजिटिव वर्ड ऑफ माउथ तेजी से फैलता है। ऐसे में ऑडियंस दूसरी फिल्मों से तुलना करने के बजाय उसी फिल्म पर टिकी रहती है, जो लंबे रन में बॉक्स ऑफिस को मजबूत बनाती है।
किसी ने नहीं सोचा था कि ‘जन नायकन’ टल जाएगी
ग्राउंड लेवल से भी इसी तरह की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। जीके सिनेमाज के मालिक रूबेन मथिवानन ने कहा, 'ईमानदारी से कहूं तो किसी ने भी यह नहीं सोचा था कि ‘जन नायकन’ आखिरी समय पर पोस्टपोन हो जाएगी। सेंसर की प्रक्रिया आमतौर पर रूटीन होती है, इसलिए सभी को भरोसा था कि फिल्म समय पर रिलीज होगी। यह पूरे ट्रेड के लिए अचानक और चौंकाने वाला फैसला रहा। हम आमतौर पर सेंसर सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही एडवांस बुकिंग शुरू करते हैं, ताकि शो टाइमिंग और शेड्यूल साफ हो सके। हालांकि, इसमें कोई शक नहीं कि अगर थलपति विजय की फिल्म रिलीज होती, तो उसकी एडवांस बुकिंग हमेशा की तरह काफी ऊंचे स्तर पर जाती।'
अब ऑडियंस और थिएटर मालिकों की उम्मीदें ‘द राजा साब’ और ‘पराशक्ति’ जैसी फिल्मों पर आ गई हैं, क्योंकि फिलहाल यह साफ नहीं है कि ‘जन नायकन’ कब रिलीज होगी। ओवरसीज मार्केट में अगर कोई स्टार थलपति विजय को चुनौती दे सकता है, तो वह सिर्फ प्रभास हैं। ऐसे में ‘जन नायकन’ का पोस्टपोन होना ‘द राजा साब’ के लिए सीधा और बड़ा फायदा बन गया है।'
आज ही रिलीज होनी थी ‘जन नायकन’
विजय थलापति की ‘जन नायकन’ आज यानी 9 जनवरी रिलीज होने वाली थी, लेकिन अब इसकी रिलीज टल गई है। यह तमिल सिनेमा के दिग्गज अभिनेता की आखिरी फिल्म मानी जा रही है। इसके बाद विजय थलापति फिल्मों से दूरी बनाकर तमिलनाडु की राजनीति में सक्रिय हो जाएंगे।